जब आंखों के सामने पिता की मृत्यु हो जाए, बेटा मुखाग्नि दे और लाश को छू तक न पाए तो उसके दिल पर क्या बीतेगी? पंकज त्रिपाठी ने कुछ ऐसी ही असह्य वेदना भोगी। उनके पिता दरोगा बलराम त्रिपाठी गुरुवार को कोरोना के शिकार हो गए। पाल पोसकर बड़ा कर नौकरी योग्य बनाने वाले पिता की मौत के बाद उनके शव से वे लिपटकर रो भी नहीं सके।
कोरोना का कहर: पिता का अंतिम संस्कार कर बोला बेटा, मुखाग्नि तो दे दी पर आखिरी बार पापा को छू भी नहीं पाया
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उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के ढेबरुआ थाना क्षेत्र के चंदवा गांव के टोला इमिलिया निवासी दरोगा बलराम त्रिपाठी (48) गोरखपुर जनपद के राजघाट थाना क्षेत्र के बसंतपुर चौकी के प्रभारी थे। पिछले वर्ष कोरोना संक्रमण काल में वह कई लोगों के सहारा बने। भूखों की मदद की और लोगों को संक्रमण से बचाव के लिए आगाह करते रहे। आठ दिन पूर्व उनकी तबीयत बिगड़ गई।
जांच में वह कोरोना संक्रमित पाए गए। इलाज के दौरान गुरुवार को उनकी मृत्यु हो गई। उनके तीन बेटी और एक बेटा है। बेटियों में एक की शादी कर चुके हैं, जबकि दो बेटी और पत्नी इंदू त्रिपाठी उनके साथ में गोरखपुर में रहती थीं।