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कोरोना का कहर: संक्रमित की मौत के 24 घंटे बाद तक घर के बाहर पड़ा रहा शव, बेबस बेटे ने ऐसे किया अंतिम संस्कार

Sat, 24 Apr 2021 03:06 PM IST
vivek shukla अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर।
अमर उजाला ब्यूरो, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Sat, 24 Apr 2021 03:06 PM IST
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corona patient dead body funeral after 24 hours due to not get ambulance in gorakhpur
प्रतीकात्मक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के गोला थाना क्षेत्र के रामनगर में कोरोना संक्रमित का शव 24 घंटे तक घर के बाहर पड़ा रहा लेकिन अंतिम संस्कार के लिए ले जाने को शव वाहन नहीं मिल सका। जिसके बाद बेबस बेटे ने अपने पैतृक गांव देवरिया जिले के बरहज बराव से ट्रैक्टर ट्राली मंगा कर पिता के शव को बाइक की मदद से ट्रॉली पर चढ़ाकर गजपुर में राप्ती घाट ले जाकर अंतिम संस्कार किया।
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कोरोना वायरस की जांच कराते लोग - फोटो : अमर उजाला
जानकारी के मुताबिक, गोला थाना क्षेत्र के रामनगर में किराए के मकान में रह रहे कोरोना संक्रमित पीडब्ल्यूडी के ड्राइवर की तबीयत बिगड़ी तो बुधवार को उन्होंने कोरोना जांच कराई। दवा देकर उन्हें घर भेज दिया गया। 
corona patient dead body funeral after 24 hours due to not get ambulance in gorakhpur
कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : PTI
गुरुवार को तबीयत और बिगड़ गई तो देवरिया से उनकी पत्नी और पुत्र राम आशीष आए। घरवाले गुरुवार की सुबह से उन्हें कोविड 19 अस्पताल में दाखिल कराने के लिए अधिकारियों से गुहार लगाते रहे लेकिन इलाज के अभाव में 55 वर्षीय कोरोना संक्रमित ने दम तोड़ दिया। 
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covid19 - फोटो : अमर उजाला।
गुरुवार को दिन में उनकी मौत हुई तो दूसरी जंग शुरू हुई, उन्हें श्मशान पहुंचाने की। एक ओर पिता की मौत के बाद बिलखती मां और दूसरी ओर अकेला राम आशीष। कुछ समझ नहीं आ रहा था। कोई भी अपनी गाड़ी से शव को श्मशान घाट तक ले जाने को तैयार नहीं हुआ। मामला एसडीएम सदर कुलदीप मीणा और बांसगांव एसडीएम विनय पांडेय तक पहुंचा। दोनों अफसरों के निर्देश के बाद भी शव वाहन नहीं मिला।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला।
हालांकि सीएचसी कौड़ीराम से मेडिकल अधिकारी ने गुरुवार की देर रात दो स्वास्थ्य कर्मियों से पांच पीपीई किट और एक लीटर हाइपो क्लोराइड पहुंचवा दिया। दोनों कर्मियों ने आश्वस्त किया कि जल्द ही शव वाहन भी भेजेंगे, लेकिन शुक्रवार शाम तक जब शव वाहन नहीं मिला तो राम आशीष ने अपने गांव के ट्रैक्टर-ट्रॉली मंगाई। ट्रैक्टर-ट्रॉली चालक और राम अशीष ने स्वयं पीपीई किट पहन कर पिता के शव को भी पीपीई किट में पैक किया। उसके बाद अपनी बाइक को ट्राली के साथ लगा कर किसी तरह शव को रखा। फिर अंतिम संस्कार गजपुर ले जाकर किया।
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