उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में कोरोना मरीजों की बढ़ती संख्या से अस्पतालों में बेड की समस्या बढ़ती जा रही है। ऐसे में ऑक्सीजन थेरेपी होम आइसोलेट मरीजों के लिए काफी कारगर साबित हो सकती है। इस सुविधा के बाद से अस्पतालों में बेड की समस्या भी दूर होगी। साथ ही होम आइसोलेट में अगर मरीजों को सांस लेने में परेशानी होगी तो उनका तत्काल इलाज भी घर पर ही शुरू हो सकेगा है। आईएमए ऑक्सीजन थेरेपी की सुविधा के लिए प्रयासरत भी है, जिससे की मरीजों की जान बचाई जा सके।
होम आइसोलेट मरीजों के लिए कारगर साबित होगी ये मशीन, जानिए कैसे बचाई जा सकेगी कोरोना मरीजों की जान
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प्रदेश में होम आइसोलेशन की सुविधा जब से शुरू हुई है, तब से प्रशासन को काफी हद तक राहत मिली है। डॉक्टरों का मानना है कि अगर लेवल-टू और थ्री के मरीजों की स्क्रीनिंग सही तरीके से घर पर हो जाए, तो करीब 20 प्रतिशत बेड और खाली हो जाएंगे। लेकिन इसके लिए ऑक्सीजन थेरेपी की सुविधा शुरू करनी होगी। आईएमए के अध्यक्ष डॉ. एसी कौशिक ने बताया कि होम ऑक्सीजन थेरेपी से अस्पतालों में कम बेड से भी काम चलाया जा सकता है। इसके लिए मेडिकल छात्रों और नर्सिंग छात्रों को प्रशिक्षित करने की जरूरत है। बताया कि इस सुविधा के लिए प्रयासरत हैं। इससे काफी हद तक मरीजों को राहत मिलेगी और ऑक्सीजन लेवल कम होने से मरीजों की जान नहीं जाएगी।
ऑक्सीजन थेरेपी के लिए इन मशीनों की होगी जरूरत
होम आइसोलेट मरीजों के शरीर में ऑक्सीजन की पर्याप्त मात्रा बनाए रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया को ऑक्सीजन थेरेपी कहते हैं। इसके लिए ऑक्सीमीटर मशीन और ऑक्सीजन कंसट्रेट मशीन की जरूरत होगी। यह मशीन बिजली और बैटरी दोनों से चलते हैं। इन मशीनों से ऑक्सीजन का लेवल शरीर में नापा जा सकता है। जरूरत के अनुसार ऑक्सीजन दिया भी जा सकता है।
इस स्थिति में जा सकती है मरीज की जान
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के चेस्ट विभागाध्यक्ष डॉ. अश्वनी मिश्रा ने बताया कि जिन मरीजों को पहले से कोई बीमारी है। जैसे शुगर, बीपी या फिर ह्रदय रोग से संबंधित, तो ऐसे मरीजों पर कोरोना का असर सबसे ज्यादा है। ऐसी स्थिति में फेफड़ों का काम करना कम हो जाता है और धमनी रक्त में ऑक्सीजन का दबाव भी कम हो जाता है। इसकी वजह से शरीर के दूसरे हिस्से में जाने वाले रक्त में ऑक्सीजन की मात्रा कम हो जाती है और मरीजों की जान भी चली जाती है। ऐसी स्थिति में मरीजों को तत्काल ऑक्सीजन की जरूरत पड़ती है। आनन-फानन में परिजन अस्पताल ले जाने की कोशिश करते हैं, लेकिन तब तक केस बिगड़ जाता है। बताया कि इस समस्या से निपटने के लिए पोर्टेबल ऑक्सीजन सिलेंडर और ऑक्सजीन नापने के लिए पल्स ऑक्सीमीटर सहारा है। यह मशीनें बाजार में उपलब्ध भी हैं। आइसोलेट मरीज इसे जरूर रखें।
90 से कम हो तो तत्काल डॉक्टर के पास ले जाएं
डॉ अश्वनी मिश्रा ने बताया कि उम्रदराज लोगों में ऑक्सीजन की जरूरत ज्यादा होती है। सामान्य तौर पर पल्स ऑक्सीमीटर यदि ऑक्सीजन लेबल 95 से 100 तक दिखाए तो घबराने की जरूरत नहीं है। यह 95 से 80 तक है तो हाइपोक्योसोमिया या ब्लड टिश्यू में ऑक्सीजन की कमी है। ऐसे में ऑक्सीजन देना जरूरी है। कोरोना के मरीजों में 90 से कम होते ही डॉक्टर के पास तत्काल जाएं।