उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले में एक दिल दहला देने वाला मामला सामने आया है। यहां गोला थाना क्षेत्र के रामनगर में किराए के मकान में रह रहे एक कोरोना संक्रमित शख्स को पहले तो सीएमओ से निवेदन करने के बाद भी किसी अस्पताल में भर्ती होने के लिए बेड नहीं मिला। फिर इलाज के अभाव में घर में ही मौत हो गई, इसके बाद शव ले जाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं आई। कोरोना के भय से पड़ोसियों ने भी दरवाजे बंद कर लिए। ऐसे में मरीज का शव पांच घंटे तक घर के दरवाजे पर पड़ा रहा।
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covid19
- फोटो : अमर उजाला।
जानकारी के मुताबिक, देवरिया जनपद के बराव निवासी 55 वर्षीय शख्स पीडब्ल्यूडी में ड्राइवर था। वह बांसगांव तहसील के रामनगर चौराहे पर किराये का मकान लेकर अकेले रहता था। रामनगर से ही गोरखपुर आता जाता था। बुधवार को उसकी तबीयत खराब हुई तो सीएचसी बांसगांव पहुंचा। वहां एंटीजन जांच में वह कोरोना पॉजिटिव निकला। सीएचसी से मिली दवा लेकर वह कमरे पर आ गया। शाम को परिवार को फोन किया तो बेटा राम अशीष, मां को लेकर रामनगर आ गया।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
गुरुवार सुबह पिता की तबीयत ज्यादा बिगड़ती देख बेटे ने अस्पताल में भर्ती कराने के लिए पहले 108 नंबर पर फोन किया लेकिन कोई रिस्पांस नहीं मिला। कोरोना पॉजिटिव जान कोई प्राइवेट वाहन उसके पिता को बीआरडी कॉलेज लेकर जाने को तैयार नहीं हुआ। इसके बाद उसने डीएम के. विजयेंद्र पांडियन को कॉल की तो उन्होंने सीएमओ का फोन नंबर देकर उनसे बात करने के लिए कहा। बेटे का आरोप है कि सीएमओ ने कहा कि बेड खाली नहीं है। आखिरकार शाम को उसकी मौत हो गई।
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प्रतीकात्मक तस्वीर।
- फोटो : अमर उजाला।
मौत के बाद शव को ले जाने के लिए 108 नंबर पर फोन किया तो उधर से कहा गया कि कोरोना पॉजिटिव का शव ले जाने के लिए यह सेवा नहीं है। दोबारा फोन करने पर कहा गया कि पहले सीएमओ से लेटर लिखवाकर लाइए। सीएचसी बांसगांव को सूचना दी तो वहां से कहा गया कि पीपीई किट लेकर स्वास्थ्य कर्मचारी जा रहे हैं।
लेकिन देर रात तक वहां पीपीई किट लेकर स्वास्थ्य कर्मचारी नहीं पहुंचे। यह हालत तब है जब ज्वाइंट मजिस्ट्रेट सदर कुलदीप मीणा और एसडीएम बांसगांव ने खुद कर्मचारियों को आदेश दिया था। लेकिन पीड़ित का कोई सुनवाई नहीं हुआ।