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कोरोना अलर्ट: सीटी वैल्यू 20 से कम है तो वायरस का लोड ज्यादा, इस जांच में हो रहा है ये खुलासा
Mon, 19 Apr 2021 03:34 PM IST
vivek shukla
नीरज मिश्र, गोरखपुर।
नीरज मिश्र, गोरखपुर।
Published by: vivek shukla
Updated Mon, 19 Apr 2021 03:34 PM IST
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कोरोना वायरस
- फोटो : PTI
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कोरोना का वायरस तेजी से शरीर में प्रवेश कर रहा है। इन सबके बीच आरटीपीसीआर जांच पर विशेषज्ञ ज्यादा जोर भी दे रहे हैं। इसकी वजह यह है कि आरटीपीसीआर जांच से यह पता करने की कोशिश है कि वायरस का लोड शरीर में कितना है और यह कितना खतरनाक साबित हो सकता है। अगर आरटीपीसीआर जांच में सीटी वैल्यू 20 से कम आ रहा है तो वायरस का लोड अधिक है। खास बात यह है कि इस बार करीब 60 प्रतिशत लोगों की सीटी वैल्यू 20 से कम आ रही है। यही वजह है कि गंभीर मरीजों की संख्या बढ़ती जा रही है।
BRD medical college
- फोटो : अमर उजाला
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ. अमरेश सिंह के मुताबिक आरटीपीसीआर जांच में सीटी वैल्यू की जांच बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। सीटी वैल्यू से ही वायरस के लोड का पता चल पाता है। दूसरी लहर में वायरस का असर बड़ी तेजी से हो रहा है। यही वजह है कि इस बार 60 प्रतिशत मरीजों की सीटी वैल्यू 20 से कम आ रही है। अन्य 40 प्रतिशत मरीजों में 25 से 35 के बीच सीटी वैल्यू है। 20 से कम सीटी वैल्यू वाले मरीज गंभीर हो रहे हैं और उनके फेफड़ों पर वायरस तेजी से असर कर रहा है। इसकी वजह से लोगों को भर्ती तक कराना पड़ रहा है। बीआरडी में ऐसे 90 प्रतिशत मरीज भर्ती हैं, जिनकी सीटी वैल्यू 20 से कम है। कई ऐसे भी मरीज है, जिनकी सीटी वैल्यू 15 या 19 हैं। ऐसी स्थिति में अगर आरटीपीसीआर जांच में सीटी वैल्यू 20 से कम आती है तो वह लोग तत्काल डॉक्टर की सलाह से दवा लें।
डॉ. अमरेश सिंह
- फोटो : अमर उजाला।
उम्र और अन्य बीमारियों का भी रखें ध्यान
डॉ. अमरेश ने बताया कि सीटी वैल्यू के साथ-साथ मरीज की उम्र और अन्य बीमारियों को भी ध्यान में रखने की जरूरत है। 50 साल की उम्र से अधिक के लोगों में अगर सीटी वैल्यू 20 से कम आती है और उन्हें किडनी, शुगर, बीपी की बीमारी है तो वह ज्यादा गंभीर हैं। ऐसे लोगों को तत्काल डॉक्टरों से सलाह लेकर अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत है। अगर किसी की उम्र 30 से 40 के बीच है और उसकी सीटी वैल्यू 19 या 16 आ रही है और उन्हें गंभीर बीमारी नहीं है तो वह भी डॉक्टर की सलाह पर होम आइसोलेशन में रहें।
डॉ. अमरेश ने बताया कि सीटी वैल्यू के साथ-साथ मरीज की उम्र और अन्य बीमारियों को भी ध्यान में रखने की जरूरत है। 50 साल की उम्र से अधिक के लोगों में अगर सीटी वैल्यू 20 से कम आती है और उन्हें किडनी, शुगर, बीपी की बीमारी है तो वह ज्यादा गंभीर हैं। ऐसे लोगों को तत्काल डॉक्टरों से सलाह लेकर अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत है। अगर किसी की उम्र 30 से 40 के बीच है और उसकी सीटी वैल्यू 19 या 16 आ रही है और उन्हें गंभीर बीमारी नहीं है तो वह भी डॉक्टर की सलाह पर होम आइसोलेशन में रहें।
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covid19
- फोटो : पीटीआई
दूसरी लहर में बढ़ी हैं यह दिक्कतें
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि दूसरी लहर में यह दिक्कतें बढ़ी हैं। जबकि पहली लहर की आरटीपीसीआर की जांच में लोगों के 20 सीटी वैल्यू से कम आते थे तो वह लोग होम आइसोलेशन में ठीक हो जाते थे। इस बार ऐसा नहीं है। दूसरी लहर का वायरस बेहद खतरनाक है। ऐसे में इससे बचने की जरूरत है।
डॉ. अमरेश सिंह ने बताया कि दूसरी लहर में यह दिक्कतें बढ़ी हैं। जबकि पहली लहर की आरटीपीसीआर की जांच में लोगों के 20 सीटी वैल्यू से कम आते थे तो वह लोग होम आइसोलेशन में ठीक हो जाते थे। इस बार ऐसा नहीं है। दूसरी लहर का वायरस बेहद खतरनाक है। ऐसे में इससे बचने की जरूरत है।
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कोरोना वायरस (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : PTI
क्या है सीटी वैल्यू
डॉ. अमरेश सिंह के मुताबिक आरटीपीसीआर की जांच में सीटी वैल्यू का पता ही लगाया जाता है। सीटी वैल्यू के जरिए यह पता किया जाता है कि वायरस का लोड शरीर पर कितना है और यह कितना असर डाल रहा है। उसी के अनुसार डॉक्टर दवा शुरू करते हैं। यही वजह है कि ज्यादा से ज्यादा आरटीपीसीआर की जांच पर विशेषज्ञों का जोर रहता है।
डॉ. अमरेश सिंह के मुताबिक आरटीपीसीआर की जांच में सीटी वैल्यू का पता ही लगाया जाता है। सीटी वैल्यू के जरिए यह पता किया जाता है कि वायरस का लोड शरीर पर कितना है और यह कितना असर डाल रहा है। उसी के अनुसार डॉक्टर दवा शुरू करते हैं। यही वजह है कि ज्यादा से ज्यादा आरटीपीसीआर की जांच पर विशेषज्ञों का जोर रहता है।