गोरखपुर में सीएमओ डॉ. सुधाकर पांडेय ने लोगों को जागरूक करते हुए कहा कि बारिश के इस मौसम में एक चम्मच साफ पानी भी इकट्ठा न होने दें। कूलर, गमले, फ्रीज ट्रे, टायर, ट्यूब, नाद आदि हर छोटी-बड़ी जगह की जांच करके भरे पानी को साफ कर दें। क्योंकि बारिश में साफ पानी में डेंगू के मच्छर पनपते हैं। उन्होंने लोगों से सावधानी बरतने की अपील की।
गोरखपुर: कूलर, गमले, फ्रीज ट्रे और टायर में जमा न होने दें पानी, जानिए क्यों स्वास्थ्य विभाग कर रहा अपील
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इनके बावजूद भी अगर डेंगू के लक्षण दिख रहे हैं तो चिकित्सक की निगरानी में इलाज करवाएं। खुद से चिकित्सा करने का प्रयास न करें। सीएमओ डॉ. पांडेय ने इस बात पर जोर दिया कि अगर जिले के किसी भी निजी अस्पताल या फिर लैब में डेंगू का मामला सामने आता है तो मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय को इसकी जानकारी दें।
इस बात का रहे ध्यान
नोडल अधिकारी वेक्टर बोर्न डिजीज कंट्रोल प्रोग्राम के डॉ. एके चौधरी ने बताया कि डेंगू के सामान्य मामलों में बुखार का चौथा से सातवां दिन बेहद खतरनाक होता है। पहले दिन से लेकर पांच दिन तक सिर्फ एनएसवन टेस्ट पॉजिटिव आता है, जबकि पांच दिनों के बाद एलाइजा टेस्ट पॉजिटिव आता है।
हड्डीतोड़ बुखार के तौर पर पहचान
नोडल अधिकारी ने बताया कि डेंगू मादा एडीज मच्छर के काटने से होता है। इस मच्छर के काटने के पांच से छह दिन बाद डेंगू के लक्षण दिखाई देने लगते हैं। डेंगू के सबसे खतरनाक लक्षणों में हड्डियों का दर्द शामिल है। इसी वजह से डेंगू बुखार को हड्डीतोड़ बुखार के नाम से भी जाना जाता है।
त्वचा पर चकत्ते, सिर दर्द, पीठ दर्द, आंखों में दर्द, तेज बुखार, मसूड़ों से खून बहना, नाक से खून बहना, जोड़ों में दर्द, उल्टी, डायरिया।