उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का आज पूर्वाश्रम (संन्यास से पहले) का जन्मदिन है। आज वे 48 साल के हो गए हैं। ऐसे में हम उनसे जुड़ी एक रोचक कहानी आपको बताने जा रहे हैं। आगे की स्लाइड्स में पढ़ें ये कहानी...
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योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : Yogi Adityanath Life
सीएम योगी 1993 में अपना घर छोड़कर गोरखपुर आए थे। यहां से संन्यास ग्रहण करने के 4 साल बाद वह अपने गांव पंचूर उत्तराखंड पहुंचे। संन्यासी के रूप में सीएम योगी की यह पहली पहली यात्रा थी।
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योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला।
यह यात्रा परिवार को देखने के लिए नहीं, अपितु उन्हें एक संन्यासी जीवन का एक महत्वपूर्ण विधान पूरा करना था। वह था अपने माता पिता से संन्यासी के रूप में भिक्षा लेने का। माता पिता ने अपने संन्यासी पुत्र को यथोचित भिक्षा के रूप में चावल, फल, और सिक्के दिए।
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योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला।
सीएम योगी को भिक्षा देते समय उनकी मां फूटफूट कर रोने लगीं। उन्होंने योगी को रोकने की बहुत कोशिश की, कहा कि अब यहां से वापस मत जा लेकिन सीएम ने अपना फैसला नहीं बदला। उन्होंने कहा- मां मैं यहां रहने नहीं, भिक्षा लेने आया हूं।
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योगी आदित्यनाथ।
- फोटो : अमर उजाला।
14 जनवरी 1994 को उन्हें दीक्षा देकर तथा योगी की सभी क्रियाओं को पूरा कर वह योगी बन गए। वह योगी आदित्यनाथ बन गए। उनके वस्त्र आजीवन भगवा रहने वाले थे। भक्त वहीं से उन्हें छोटे महाराज की उपाधि देकर संबोधित करने लगे।
साभार- यह कहानी योगी आदित्यनाथ की जीवन यात्रा पर लिखी किताब योद्धा योगी से लिया गया है, इसे प्रवीण कुमार ने लिखा है।