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Chhath 2022: कल नहाय-खाय से शुरू होगा लोक आस्था का महापर्व छठ, तैयारियों में जुटी महिलाएं

Thu, 27 Oct 2022 02:49 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।
संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर। Published by: vivek shukla Updated Thu, 27 Oct 2022 02:49 PM IST
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Chhath 2022 will start with bathing tomorrow in UP
Chhath Puja 2022 - फोटो : अमर उजाला।

लोक आस्था का महापर्व छठ शुक्रवार को नहाय-खाय के साथ शुरू होगा। 29 अक्तूबर को खरना, 30 अक्तूबर को अस्ताचलगामी सूर्य को अर्घ्य और 31 को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ चार दिनों के पर्व का समापन होगा। दीपावली व गोवर्धन पूजा के बाद चार दिवसीय छठ पूजा की तैयारियां शुरू हो गई हैं। दुकानों पर खरीदारों की भीड़ जुटने से बाजारों में रौनक दिखने लगी है। महानगर से लेकर गांवों तक घाटों व पोखरों की साफ-सफाई होने लगी है। दउरी बनाने वाले युद्ध स्तर पर जुटे हैं। व्यापारी विभिन्न प्रकार के फलों को मांगा रहे हैं।



महानगर के प्रमुख चौराहों रेती, बसंतपुर, घंटाघर, गोलघर, राप्तीनगर, धर्मशाला बाजार समेत आसपास के इलाकों के बाजार सज गए हैं। लोग पूजा के लिए छोटी से छोटी सामग्री जुटाने लगे हैं। छठ पूजा के लिए कोसी, पीतल या बांस  का सूप, दउरा, साड़ी, गन्ना, नारियल, फल सहित अर्चना के लिहाज से हर सामान की खरीदारी होने लगी है।

साड़ियों की दुकान पर महिलाओं की भीड़ बढ़ गई है। साथ ही इस समय चूड़ी, बिंदी सहित महिलाओं की साज-सज्जा से संबंधित दुकानों पर भी लोगों की भीड़ देखी जा सकती है।

 

Chhath 2022 will start with bathing tomorrow in UP
Chhath Puja 2022 - फोटो : अमर उजाला।

थोक मंडी में उमड़ी भीड़
छठ महापर्व को लेकर पूर्वांचल की सबसे बड़ी थोक मंडी महेवा में खरीदारों की भीड़ उमड़नी शुरू हो गई है। महेवा के नारियल कारोबारी अविनाश गुप्ता ने बताया कि आंध्रप्रदेश व तमिलनाडु से प्रतिदिन 25 ट्रक नारियल की आवक हो रही है। जो 1800 रुपये सैकड़ा बिक रहा है। सेब व्यापारी सुरेंद्र कुमार कुशवाहा ने बताया कि कश्मीर से प्रतिदिन 26 गाड़ियां सेब की आ रही है। थोक मंडी में सेब 25 से 40 रुपये प्रति किलो की दर से बिक रहा है। बताया कि गुजरात से प्रतिदिन चार गाड़ी अनार की आ रही है। इसकी कीमत 50 से 90 रुपये प्रति किलो है। इसी तहर पूणे से अमरूद की आवक हो रही है जो 80 से 100 रुपये किलो बिक रहा है। नासिक और बंगलुरू से अंगूर की आवक हो रही है जो 120 से 140 रूपये किलो बिक रहा है। संतरा व्यापारी जगदीश कुमार सोनकर ने बताया क प्रतिदिन 200 टन संतरे की आवक नागपुर से हो रही है, जो 40 से 50 रुपये किलो बिक रहा है। वहीं सरीफा की कीमत मंडी में 600 रुपये सैकड़ा है।
 

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Chhath Puja 2022 - फोटो : अमर उजाला।

संतान की सुख-समृद्धि के लिए रखा जाता है व्रत
ज्योर्तिविद पंडित नरेंद्र उपाध्याय के अनुसार, छठ व्रत रोगों से मुक्ति, संतान के सुख और समृद्धि में वृद्धि के लिए रखा जाता है। मान्यता है कि सच्चे मन से व्रत रखने से मनोकामना जरूर पूरी होती है। जिसकी मनोकामना पूरी होती है, वह कोसी भरते हैं। बहुत से लोग घाटों पर दंडवत पहुंचते हैं।

पहला दिन: नहाय खाय, 28 अक्तूबर
छठ महापर्व का आरंभ नहाय खाय से आरंभ होता है। 28 अक्टूबर को तृतीया तिथि दिन में 12 बजकर 29 मिनट, पश्चात चतुर्थी तिथि, अनुराधा नक्षत्र दिन में एक बजकर 25 मिनट पश्चात ज्येष्ठा नक्षत्र है। इस दिन रवियोग और सर्वार्थ सिद्धि योग, नामक दो सिद्धिकारी योग भी विद्यमान है। नहाय-खाय के अंतर्गत व्रती महिलाएं नदी, तालाब आदि में जाकर स्नान करेंगी। घर आकर खाना बनाएंगी। खाने में कद्दू व चावल बनाया जाता है। श्रद्धालु इसे कद्दू भात कहते हैं। नहाय खाय के दिन अरवा चावल, चने की दाल एवं कद्दू की सब्जी बनाई जाती है। व्रतियों के प्रसाद ग्रहण करने के बाद ही परिवार के अन्य लोग भोजन ग्रहण करते हैं।

 

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Chhath Puja 2022 - फोटो : अमर उजाला।

दूसरा दिन : खरना 29 अक्तूबर
छठ पर्व का दूसर दिन खरना है। 29 अक्तूबर को चतुर्थी तिथि का मान 10 बजकर 28 मिनट, पश्चात पंचमी तिथि है। इस दिन ज्येष्ठा नक्षत्र दिन में 12 बजकर पांच मिनट तक, पश्चात मूल नक्षत्र और अतिगण्ड और सुकर्मा नामक योग है। इस दिन व्रती महिलाएं उपवास करेंगी। शाम को पूजा करने के उपरांत व्रत का पारण करेंगी। व्रत खोलने में नैवेद्य और प्रसाद का उपयोग करेंगी। दिनभर उपवास रखकर शाम तक सूर्य भगवान की पूजा करने के पश्चात खीर पूड़ी का भोग लगाकर हवन किया जाता है।

तीसरा दिन : संध्या अर्घ्य 30 अक्तूबर
यह छठ महापर्व का तीसरा दिन है। 30 अक्तूबर को पंचमी तिथि सुबह आठ बजकर 15 मिनट तक, पश्चात षष्ठी तिथि है। इस दिन मूल नक्षत्र दिन में 10 बजकर 34 मिनट तक पश्चिम पूर्वाषाढ़, सुकर्मा और सिद्धि नामक औदायिक योग है। इस दिन व्रती दिनभर व्रत रखकर अन्न जल ग्रहण नहीं करेंगी। शाम को अस्ताचलगामी सूर्य को तालाब या नदी में अर्घ्य देंगी।

 

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छठ पूजा। - फोटो : अमर उजाला

चौथा दिन : उगते हुए सूर्य को अर्घ्य 31 अक्तूबर
छठ महापर्व का अंतिम दिन 31 अक्तूबर को है। इस दिन सुबह आठ बजकर 56 मिनट तक पूर्वाषाढ़ और धृति योग है। चंद्रमा की स्थिति अपने परम मित्र बृहस्पति के राशि धनु पर रहेगा। इस दिन व्रती ब्रह्म मुहूर्त में नई अर्घ्य सामग्री लेकर जलाशय में खड़ी होकर अरुणोदय की प्रतीक्षा करेंगी। जैसे ही क्षितिज पर अरुणिमा दिखाई देगी, वह मंत्रोच्चार के साथ भगवान सूर्य को अर्घ्य देंगी। इसके बाद वह व्रत का पारण करेंगी।

व्रत मात्र से मिलता है पूरा फल
पंडित शरद चंद्र मिश्र के अनुसार, वैसे तो हर पूजा व्रत में बहुत सी पूजन सामग्रियों का विधान है, लेकिन ऐसी कोई बाध्यता नहीं है। सामग्री की व्यवस्था अपने सामर्थ्य के अनुसार ही की जा सकती है। कुछ न रहने पर व्रत मात्र से ही छठ के पूर्ण फल की प्राप्ति होती है। पूजन बस विधि-विधान से सही और उचित होना चाहिए। सूर्य षष्ठी व्रत पूजन में गन्ना, नारियल, आम का पल्लव, पान, सुपारी, फल, लौंग, इलायची गुण, रुई, चौमुखी दिया, सूप, दउरा, रोली, साठी चावल, अगरबत्ती, कपूर, चूड़ा, सरसों तेल, आलता, नींबू बड़ा व छोटा, आटे का ठेकुआ, मूली, कद्दू, हल्दी, अदरक, सुथनी, पंचमेवा, देसी घी तथा सभी प्रकार के फलों का इस्तेमाल होता है।

 

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