बात जब श्रृंगार की होती है तो महिलाओं का नाम सबसे पहले लिया जाता है। लेकिन इस सावन बात महिलाओं के फैशन की नहीं बल्कि देवों के देव महादेव की हो रही है। लोग अक्सर महिलाओं के 16 श्रृंगार के बारे में बात करते हैं लेकिन बहुत कम ही लोग भगवान शिव के 9 श्रृंगार के बारे में जानते हैं। आइए जानते हैं आखिर कौन से ऐसे 9 श्रृंगार हैं जो भस्मधारी महाकाल को करना बेहद पसंद है।
माना जाता है कि भगवान शिव की पूजा करने से व्यक्ति की मनोकामना जल्द पूरी हो जाती है। भोलेबाबा अपने भक्तों को कष्टों में नहीं देख सकते हैं। ऐसे में शिव भक्तों को भोलेबाबा को मनाने के लिए उनके 9 रत्नों का सहारा लेना चाहिए। आइए जानते हैं क्या हैं उनके 9 रत्न।
भगवान शिव के 9 रत्नों के नाम हैं-पैरों में कड़ा, मृगछाला, रुद्राक्ष, नागदेवता, खप्पर, डमरू, त्रिशूल, शीश पर गंगा और शीश पर चंद्रमा। कहा जाता है कि भोलेबाबा के इन सभी अलग-अलग नौ रत्नों की अपना एक अलग महत्व है।
भगवान शिव के हर रत्न के साथ उनकी पूजा करने से व्यक्ति को उसका अलग लाभ मिलता है। सिर पर चंद्रमा धारण करने वाले शिव जी की पूजा करने से व्यक्ति की कुंडली में अनुकूल ग्रहों की दशा मजबूत होती है। इसके लिए शिव जी का दूध से अभिषेक करना चाहिए।
गंगाधारी शिव की प्रतिमा की पूजा करने से पितृदोष से मुक्ति मिलती है। कहा जाता है कि ऐसा करने से विद्या, बुद्धि और कला में वृद्धि होती है। कहा जाता है कि भस्मधारी शिव की पूजा करने से न सिर्फ सुखों की प्राप्ति होती है बल्कि ऐसा करने से व्यक्ति अपने शत्रुओं पर भी विजय प्राप्त कर सकता है। इसके अलावा त्रिशूल धारण करने वाले शिव का आराधना करने से विवाह में आने वाली सभी रुकावटें दूर होती हैं।