आज उस्ताद अमजद अली खान का 79वां जन्मदिन है। हिंदुस्तानी संगीत के प्रसिद्ध रागों के अलावा अमजद ने कई रागों का सृजन किया और दूसरी जगहों के धुनों को अपने संगीत में मिला लिया। सेनिया बीनकर घराने की शुद्धता को कायम रखते हुए अमजद ने हरिप्रिया, सुहाग भैरव, विभावकारी चन्द्रध्वनि, मंदसमीर किरण रंजनी जैसे नए रागों को लेकर आए। आज उनके जन्मदिन पर जानिए उनसे जुड़ी दिलचस्प बातें।
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अमजद अली खान
- फोटो : इंस्टाग्राम@aaksarod
12 वर्ष की आयु में अपनी पहली संगीत प्रस्तुति देकर उस्ताद अमजद अली खान ने अपनी कला से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया था। सरोद वादक अमजद अली खान ने ऐसे वाद्य यंत्र से भारतीय संगीत को समृद्ध किया, जो ईरान से लाए गए वाद्य रबाब की तरह है, लेकिन उसमें भारतीय संगीत के मुताबिक कुछ परिवर्तन किए गए हैं।
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अमजद अली खान
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9 अक्तूबर 1945 को जन्मे अमजद अली खान ने संगीत के लिए प्रसिद्ध सेनिया बंगश घराने के पारंपरिक संगीत को जीवित रखा है। अपने दोनों बेटों अमान अली और अयान अली को सरोद में दक्ष कर वे इस संगीत की परंपरा को सातवीं पीढ़ी के सुरक्षित हाथों में सौंप चुके हैं।
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अमजद अली खान
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ग्वालियर के शाही परिवार के संगीतकार हाफिज अली खां के पुत्र अमजद अली खां अपने पिता के खास शिष्य रहे। अमजद अली ने पिता हाफिज अली खान पर माई फादर, ऑवर फ्रैटर्निटी : द स्टोरी ऑफ हाफिज अली खान एंड माई वर्ल्ड शीर्षक से पुस्तक लिखी है। इस किताब में भारतीय संगीत से जुड़ी कई रोचक बातें लिखी हुई हैं। इस पुस्तक का विमोचन अमिताभ बच्चन ने किया था।
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अमजद अली खान ने भरतनाट्यम नृत्यांगना शुभालक्ष्मी को अपना हमसफर बनाया। दरअसल, दोनों की पहली मुलाकात 1974 के दौरान कोलकाता में कला संगम कार्यक्रम में स्टेज परफॉर्मेंस देने के बाद एक कॉमन फ्रेंड के घर में हुई। दोनों भले ही एक-दूसरे को पसंद करने लगे, लेकिन उन्हें शादी के लिए करीब दो साल तक इंतजार किया। अमजद और शुभालक्ष्मी की शादी साल 1976 के दौरान हुई। उनके दो बेटे अमान अली बंगश और अयान अली बंगश हैं।