टीवी के लोकप्रिय धारावाहिक 'कुमकुम भाग्य' में रिया मेहरा का किरदार निभाने वाली अभिनेत्री नैना सिंह ने 'बिग बॉस' के 14वें सीजन में वाइल्ड कार्ड एंट्री मारी है। बहुत से कलाकारों की तरह नैना भी लॉकडाउन के इस दौर में बेरोजगारी का शिकार थीं इसलिए उन्होंने बिग बॉस के ऑफर को तुरंत स्वीकार कर लिया। नैना का मानना है कि उनका सबसे बड़ा हथियार उनकी दोस्ती ही है जिसे वह 'बिग बॉस' के घर में भी इस्तेमाल कर सकती हैं। शो में जाकर अपना खेल शुरू करने से पहले अमर उजाला ने नैना से खास बातचीत की।
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'बिग बॉस' का हिस्सा बनने का ऑफर आपको पहले भी मिला या फिर यह आपका पहला ही मौका था?
काम के मामले में मैं ज्यादा भाव नहीं खाती। कोई भी काम मुझे मिलता है तो मैं चुपचाप कर लेती हूं। कोरोना की वजह से लॉकडाउन होने के बाद सब खाली ही बैठे हुए थे। किसको आजादी थी काम चुनने की। अपने घर पर रहकर दूसरे ही काम किए हैं सबने। मैं अब बिग बॉस के साथ अपनी दूसरी पारी शुरू करने जा रही हूं। यह मेरा पहला ही मौका था जब बिग बॉस ने मुझसे इस शो का हिस्सा बनने के लिए पूछा। और मैंने तुरंत हां कर दी।
'बिग बॉस' में पहले से ही खिलाड़ी अपना खेल खेल रहे हैं। उनके खेल को देखते हुए आपने अपनी क्या रणनीति बनाई है?
इन सब का खेल बाहर से देखने तो मिल रहा है लेकिन सिर्फ कुछ चीजें ही हम देख पा रहे हैं। घर के अंदर जब मैं जाऊंगी तो उनके साथ मुझे चौबीसों घंटे रहना है। हो सकता है कि वह जो काम अब कर रहे हैं वह तब न करें जब मैं उनके बीच में रहूं! पहले से किसी के बारे में राय बना लेना बेकार है। हो सकता है कि जो इंसान दूसरों के साथ कुछ और व्यवहार करता है, वह मेरे साथ कुछ और व्यवहार करे। इसलिए मैं चाहती हूं कि मैं एकदम साफ दिमाग से जाऊं। मैं खुद जाकर चीजों को अपने साथ होता हुआ देखूं और उसके बाद ही अपनी कोई राय बनाऊं। मेरी दोस्ती और दुश्मनी का स्तर कुछ अलग ही होता है। मैं जिससे दोस्ती करती हूं, वह इंसान कभी दोगला नहीं हो सकता। और मैं भी अपनी दोस्ती में कभी पीछे नहीं हटती। लेकिन, इन लोगों का खेल देखकर तो मैं कह ही नहीं सकती कि आखिर इनमें से दोस्ती करने लायक है कौन? सब अपना खेल खेल रहे हैं क्योंकि सब जीतना चाहते हैं। मैं उनके खेल को जानती हूं इसलिए हो सकता है कि कुछ चीजें मेरे पक्ष में रहें।
अचानक से जब इन लोगों के बीच में वाइल्ड कार्ड एंट्री लेकर आप पहुंचेंगी तो उनके खेल पर क्या असर पड़ सकता है?
शो में हर बार जब वाइल्ड कार्ड एंट्रीज लेकर लोग पहुंचते थे तो उनका नंबर कोई एक से डेढ़ महीने बाद आता था। लेकिन, इस बार थोड़ा जल्दी हो रहा है। घर में पहले से ही मौजूद लोगों को तो पता भी नहीं है कि आखिर उन्हें करना क्या है? किस तरह खेलना है? यहां बाहर बैठकर उन्हें देखकर इतना तो मैं जान गई हूं कि हमें घर के अंदर पहुंचकर क्या करने की जरूरत है? मुझे लगता है कि घर में पहुंचकर हम भी उनके बराबर में ही खड़े होंगे। मुझे नहीं लगता कि कुछ ज्यादा फर्क पड़ने वाला है। आपको सिर्फ अपने पत्ते ढंग से खेलने आने चाहिए। अगर आप वाइल्ड कार्ड एंट्री मार रहे हो तब भी और आप घर में पहले से रह रहे हो तब भी। सीन कैसे भी पलट सकता है।
मानसिक रूप से तो इस तरह के खेल की तैयारी ज्यादा नहीं कर सकते। लेकिन, शारीरिक तौर पर आपने अपने आप को कितना तैयार किया है?
मैं ठाकुर हूं और उत्तर प्रदेश से हूं (हंसते हुए)। मैंने बचपन से ही हर तरह के खेल खेले हैं। मैं बचपन से ही फुटबॉल, बास्केटबॉल, क्रिकेट जैसे खेल खेलती आ रही हूं इसलिए मेरे अंदर खेल भावना भी है। मैंने एक रियलिटी शो और भी कर रखा है। मैं उससे इस शो की तुलना नहीं कर रही हूं लेकिन हम जिंदगी में जो भी करते हैं, उससे कुछ न कुछ जरूर सीखते हैं। हमें अपनी कमजोरियां और ताकत पता चलती है। जब मैंने स्प्लिट्सविला किया था तो वह शो मैंने टास्क कर करके ही जीत लिया था। उसके अलावा मेरे पास सुरक्षित रहने का कोई और विकल्प नहीं था। मानसिक तौर पर मैं किस तरह व्यवहार करूंगी? वह तो मैं नहीं जानती। लेकिन, शारीरिक तौर पर मैं सब कुछ संभाल लूंगी।