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सेंसर बोर्ड: सीबीएफसी ने 35 साल बाद किया नियमों में बदलाव, ड्रग्स सीन्स से हिंसा तक; जानें क्या-क्या बदला?

Sat, 19 Sep 2026 01:26 PM IST
राजश्री वर्मा एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला Published by: राजश्री वर्मा Updated Sat, 19 Sep 2026 01:26 PM IST
सार

CBFC Revised Film Certification Guidelines: सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन ने 35 साल बाद अपने नियमों में बदलाव करते हुए नई गाइडलाइंस जारी की है। आइए जानते हैं कि इस नई गाइडलाइंस में क्या-क्या बदलाव हुए हैं। 

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Cbfc Revised Film Certification Guidelines Stricter Age Ratings Drug Warnings Know Details
सीबीएफसी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने फिल्मों के सर्टिफिकेशन को लेकर नई गाइडलाइंस जारी की हैं। इनमें फिल्मों में ड्रग्स, हिंसा, यौन हिंसा, बच्चों के साथ दुर्व्यवहार और अन्य संवेदनशील विषयों को दिखाने को लेकर सख्त नियम बनाए गए हैं। सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) की ये नई गाइडलाइंस 18 सितंबर को मंत्रालय की तरफ से जारी की गईं। इन्होंने दिसंबर 1991 में जारी की गई पुरानी गाइडलाइंस की जगह ली है।
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इन बदलावों में सबसे अहम है कि फिल्मों में नशीले पदार्थों या साइकोट्रॉपिक पदार्थों के सेवन या तस्करी से जुड़े सीन दिखाने पर एक तय चेतावनी देना जरूरी होगा। ऐसे सीन के साथ यह चेतावनी दिखाई जाएगी: 'गैरकानूनी नशीले पदार्थ स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाते हैं और जेल की सजा दिला सकते हैं। ड्रग्स को ना कहें।' नई गाइडलाइंस में यह भी कहा गया है कि फिल्मों में शराब पीने, ड्रग्स की लत या तंबाकू के सेवन को सही ठहराने या बढ़ावा देने वाले दृश्य नहीं दिखाए जाने चाहिए।
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Cbfc Revised Film Certification Guidelines Stricter Age Ratings Drug Warnings Know Details
सीबीएफसी - फोटो : सोशल मीडिया
नई सीबीएफसी गाइडलाइंस में क्या कहा गया?
  • नशीले या साइकोट्रोपिक पदार्थों के सेवन या तस्करी वाले सीन में तय कानूनी चेतावनी दिखानी होगी।
  • शराब पीने, ड्रग्स की लत या तंबाकू के सेवन को सही ठहराने या बढ़ावा देने वाले दृश्य नहीं दिखाए जाने चाहिए।
  • गाइडलाइंस में नस्लीय, धार्मिक या दूसरे समूहों का अपमान करने वाले दृश्यों या शब्दों पर रोक है। साथ ही सांप्रदायिक, अंधविश्वासी, विज्ञान-विरोधी या देश-विरोधी सोच को बढ़ावा देने वाले कंटेंट पर भी रोक है।
  • सीबीएफसी को यह पक्का करना होगा कि हिंसा समेत असामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा न दिया जाए या उन्हें सही न ठहराया जाए।
  • महिलाओं का अपमान करने वाले दृश्य, जिनमें यौन हिंसा या छेड़छाड़ शामिल है नहीं दिखाए जाने चाहिए। अगर ऐसे दृश्य कहानी के लिए ज़रूरी हों, तो उन्हें कम से कम रखा जाना चाहिए और उनमें गैर-जरूरी डिटेल नहीं होनी चाहिए।
  • फिल्मों में बच्चों को हिंसा का शिकार, हिंसा करने वाला या हिंसा देखने के लिए मजबूर किए गए व्यक्ति के रूप में दिखाने से बचना होगा। साथ ही बच्चों के साथ किसी भी तरह का दुर्व्यवहार भी नहीं दिखाया जाना चाहिए।
  • गाइडलाइंस में शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्यांग लोगों के साथ दुर्व्यवहार या उनका मजाक उड़ाने वाले गैर-जरूरी दृश्यों से बचने की सलाह दी गई है।
  • जानवरों के साथ अनावश्यक क्रूरता या दुर्व्यवहार के सीन भी नहीं दिखाए जाने चाहिए।
  • ऐसे सीन नहीं दिखाए जाने चाहिए जो कानून के प्रति उपहास, अपमान या अनादर पैदा करें या अदालतों की गरिमा को कम करें।
  • फिल्मों में भारत की संप्रभुता और अखंडता पर सवाल उठाने या देश की सुरक्षा को खतरे में डालने वाली सामग्री नहीं होनी चाहिए।
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एज मार्कर्स में क्या हुआ बदलाव?
नई गाइडलाइंस में सरकार की ओर से मई 2025 में शुरू की गई उम्र के आधार पर सर्टिफिकेशन की कैटेगरी को बरकरार रखा गया है-
  • U/A 7+: 7 साल और उससे ज्यादा उम्र के बच्चों के लिए कंटेंट। 7 साल से कम उम्र वालों के लिए माता-पिता की निगरानी जरूरी।
  • U/A 13+: 13 साल और उससे ज्यादा उम्र के दर्शकों के लिए कंटेंट। 13 साल से कम उम्र वालों के लिए माता-पिता की निगरानी जरूरी।
  • U/A 16+: 16 साल और उससे ज्यादा उम्र के दर्शकों के लिए सही कंटेंट। 16 साल से कम उम्र वालों के लिए माता-पिता की निगरानी जरूरी।
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सीबीएफसी मेंबर लिस्ट - फोटो : सोशल मीडिया
टाइटल के लिए भी रखना होगा इन बातों का ख्याल
सीबीएफसी को फिल्मों के टाइटल की भी जांच करने के लिए कहा गया है। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि फिल्म के नाम भड़काऊ, अश्लील, आपत्तिजनक या सर्टिफिकेशन गाइडलाइंस का उल्लंघन करने वाले न हों।

नई गाइडलाइंस में पुराने नियम भी बरकरार
नई गाइडलाइंस पुराने नियमों को भी आगे बढ़ती है। पुराने नियमों में पहले से ही ड्रग्स की लत को बढ़ावा देने, सही ठहराने या उसका महिमामंडन करने वाले कंटेंट को दिखाने से मना किया गया था। हालांकि, ऐसे सीन के लिए स्क्रीन पर एक तय चेतावनी दिखाने का नियम नहीं था। बता दें कि ये बदलाव ऐसे समय में आए हैं, जब अभिनेता प्रीति जिंटा, सुनील शेट्टी और पंकज त्रिपाठी समेत 18 सदस्यों को नए सीबीएफसी पैनल में तीन साल के कार्यकाल के लिए नियुक्त किया गया है।
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