बॉलीवुड के खूंखार खलनायक का नाम जब जहन में आता है, तो सबसे पहले प्राण उर्फ कृष्ण सिकंद अहलूवालिया का नाम आता है। प्राण, एक भारतीय अभिनेता थे, जिन्हें भारतीय सिनेमा के इतिहास में अब तक के सबसे महान खलनायकों में से एक और 1940 से 1990 के दशक तक हिंदी सिनेमा में सहायक अभिनेता के रूप में जाना जाता है। वह भारतीय सिनेमा के इतिहास में सबसे सफल और सम्मानित दिग्गज अभिनेताओं में से एक हैं। बता दें कि प्राण अपने समय के सबसे अधिक भुगतान पाने वाले अभिनेताओं में से एक थे। आज प्राण की पुण्यतिथि है। अपनी फिल्मों के जरिए वह हमेशा अपने प्रशंसकों के बीच जिंदा रहेंगे।
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दिवंगत अभिनेता प्राण
- फोटो : सोशल मीडिया
उन्होंने 40 के दशक में नायक की कई भूमिकाएं निभाईं। इसके बाद 1942 से 1991 तक खलनायर के किरदार में जमकर धमाल मचाया था। 50 के दशक में प्राण खलनायक और सहायक अभिनेता के रूप में अपने करियर के चरम पर थे। स्क्रीन पर नकारात्मक किरदारों में उनका अभिनय हीरो के किरदार पर भी भारी पड़ता था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार फिल्मों में प्राण की खलनायकी इतनी दमदार हुआ करती थी कि लोगों ने अपने बच्चों का नाम 'प्राण' रखना बंद कर दिया था।
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दिवंगत अभिनेता प्राण
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प्राण का जन्म 12 फरवरी 1920 में मुंबई में हुआ। अपनी खलनायक की भूमिका के लिये जाने जाते हैं प्राण। फिल्मफेयर पुरस्कार और बंगाली फिल्म जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन अवार्ड्स जीतने वाले भारतीय अभिनेता प्राण की फिल्मों को उनके प्रशंसक आज भी देखना पसंद करते हैं।
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दिवंगत अभिनेता प्राण
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प्राण की पहचान हिंदी फिल्म जगत के सबसे खूंखार विलेन के तौर पर की जाती है। 'राम और श्याम', 'मिलन', 'जंजीर' और 'डॉन' जैसी एक से बढ़कर शानदार फिल्मों में अभिनय का दमदार जौहर दिखा चुके अभिनेता प्राण की गिनती बॉलीवुड के महानतम कलाकारों में की जाती है। प्राण के फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखने की दास्तान किसी फिल्मी स्क्रिप्ट से कम नहीं है। उनको अपनी पहली फिल्म का ऑफर पान की दुकान पर मिला था।
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दिवंगत अभिनेता प्राण
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प्राण को पहली फिल्म मिलने की कहानी बहुत फिल्मी है। प्राण अक्सर लाहौर में एक पान की दुकान पर जाया करते थे। उसी पान की दुकान पर मशहूर फिल्म राइटर वली मोहम्मद भी पान खाने जाते थे, जब वली मोहम्मद फिल्म यमला जट बना रहे थे, तो उसमें उन्हें खलनायक के रोल के लिए किसी नए चेहरे की तलाश थी। वली मोहम्मद की नजर जब प्राण पर पड़ी तो उन्होंने प्राण को मिलने के लिए बुलाया। प्राण ने वली मोहम्मद की बात को कोई तवज्जों नहीं दी, जब दोबारा दोनों की मुलाकात हुई तो वली ने प्राण को फिल्म में काम करने के लिये तैयार कर लिया। इसके बाद प्राण ने फिल्म 'यमला जट' में काम किया। इस फिल्म में अभिनय करने के बाद फिर कभी प्राण ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। प्राण ने जिंदगीभर वली मोहम्मद को अपना गुरू माना। प्राण ने अपने शानदार काम की बदौलत कई बार फिल्म फेयर का पुरुस्कार जीता। इसके साथ उनके बेहतरीन काम के लिए भारत सरकार ने उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया। इसके अलावा प्राण को दादा साहब फाल्के पुरुस्कार से भी नवाजा जा चुका है।