वेब सीरीज रिव्यू: नवंबर स्टोरी
लेखक, निर्देशक: इंद्र सुब्रमण्यन
कलाकार: तमन्ना भाटिया, जी एम कुमार और पशुपति आदि।
ओटीटी: डिज्नी प्लस हॉटस्टार
रेटिंग: **
जो काम अभिनेत्री तमन्ना भाटिया ने अब शुरू किया है, वही काम अगर उन्होंने अपनी दो सुपरहिट फिल्मों ‘बाहुबली द बिगनिंग’ और ‘बाहुबली द कनक्लूजन’ के समय ही कर लिया होता तो वह हिंदी सिनेमा की टॉप थ्री अभिनेत्रियों में शुमार हो सकती थीं। दक्षिण में उन्होंने बहुत काम किया है। बहुत नाम भी किया है। लेकिन, हिंदी सिनेमा में जब जब उन्होंने वापसी करने की कोशिश की, हर बार गलत फिल्म और गलत टीम चुनी। ‘हिम्मतवाला’, ‘हमशकल्स’, ‘एंटरटेनमेंट’, ‘खामोशी’ और अब ‘बोले चूड़ियां’ ये ऐसी फिल्में हैं जिनके चलते तमन्ना की हिंदी सिनेमा की टॉप हीरोइन बनने की तमन्ना अधूरी ही रह गई। अब जाकर उन्होंने निर्माता करण जौहर की शरण ली है। अब करण जौहर की कंपनी धर्मा कॉर्नरस्टोन एजेंसी ही तय करती है कि तमन्ना हिंदी में कौन सी फिल्म करेंगी और कौन सी नहीं। इस बीच उन्हें सुजॉय घोष की एक फिल्म समेत कुछ अच्छे प्रस्ताव मिले भी हैं। पर, ‘नवंबर स्टोरी’ इस नई व्यवस्था से पहले की सीरीज है और तमन्ना की बहुत मेहनत के बाद भी इसमें तमन्ना के करियर को फायदा पहुंचाने वाला कुछ भी नहीं है।
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नवंबर स्टोरी वेब सीरीज रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तमन्ना भाटिया को पता है कि लीड रोल करने का समय उनके हाथ से तेजी से निकल रहा है। 16 साल हो चुके हैं उन्हें बड़े परदे पर कदम रखे हुए। वह सलमान खान जैसा स्टारडम कभी हासिल नहीं कर पाईं कि लगातार बार बार एक जैसा रोल करने के बाद भी उनके फैंस उन्हें सिर आंखों पर बिठाए रखें। इसीलिए, तमन्ना अब किरदारों से प्रयोग कर रहीं हैं। निर्देशक राम उर्फ इंद्र सुब्रमण्यन की वेब सीरीज ‘नवंबर स्टोरी’ करने के पीछे भी वजह यही दिखती है। बाप बेटी के रिश्तों की इस कहानी में तमन्ना का रोल बहुत ही अच्छा लिखा जा सकता था। लेकिन, सीरीज की पटकथा ने इस एक बहुत ही अच्छी कहानी का पोस्टमार्टम कर दिया है। निर्देशक चूंकि खुद ही इसके लेखक हैं लिहाजा सीरीज को खराब कर देने का ठीकरा भी उन्हीं के सिर फूटना है।
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नवंबर स्टोरी वेब सीरीज रिव्यू
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
वेब सीरीज ‘नवंबर स्टोरी’ तमिल में बनी वेब सीरीज है। इसे हिंदी में डब करके रिलीज किया गया है। तमन्ना भाटिया पर हिंदी सिनेमा के दर्शकों की निगाहें शुरू से टिकी रही हैं, लेकिन अपनी ही फिल्मों में महज ‘एंटरटेनमेंट’ बनकर रह गई इस अभिनेत्री ने किरदारों की दमदार चुनौतियां स्वीकार करने की हिम्मत कम ही जुटाई। अब वह इसकी हिम्मत जुटा भी रही हैं तो उन्हें निर्देशक वैसे नहीं मिल रहे जो उनकी सीमित अभिनय क्षमता को संजीदगी से पेश कर सकें। अल्जामइर्स से पीड़ित अपने लेखक पिता को बचाने में लगी एक बेटी की इस कहानी में इतने सारे झोल हैं कि दर्शक माथा पकड़ लेता है। जब ये जाहिर हो चुका है कि अनुराधा अपना पुश्तैनी मकान बिना अपने पिता गणेशन की मर्जी से बेच नहीं सकती तो फिर वह खरीदार तलाशती क्यों फिर रही है? टाइमपास के लिए? या फिर कि किसी पुलिस टीम को अगर किसी केस को हल करने की डेडलाइन ही सेट करनी है तो फिर वह वहां जाकर मेहनत करेगी जहां सबूत या अपराधी मिलने की संभावना अधिक होगी, न कि खुद को ही एक कमरे में बंद कर लेगी। कोई राइटर्स ब्लॉक थोड़े ही तोड़ना होता है पुलिस को!
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वेब सीरीज ‘नवंबर स्टोरी’ का गठन शुरू में अच्छा दिखता है। हर किरदार की अपनी दिक्कतें हैं और वह अपने किसी एक खास मिशन पर भी है। परतों में खुलते इन किरदारों से दर्शक का मन भी जुड़ने लगता है लेकिन फिर सुब्रमण्यन का मन झूला झूलने का होने लगता है। वह कहानी को पेंडुलम की तरह एक सिरे से दूसरे सिरे तक झुलाने लगते हैं। कई बार तो रिवाइंड करके समझना पड़ता है कि जो कुछ परदे पर हो रहा है, उसका पिछला सिरा कहां से जुड़ता है। वेब सीरीज दर्शक मनोरंजन के लिए देखते हैं लेकिन यहां लगता है उनका आईक्यू टेस्ट चल रहा है। दिमाग पर इतना जोर देना ठीक नहीं। वह भी कोरोना संक्रमण के इस अवसाद काल में।
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- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तमन्ना भाटिया के लिए ये सीरीज अपनी प्रतिभाएं दिखाने का एक अच्छा मौका हो सकती थी। सीरीज हिट होती तो जाहिर है मुंबई फिल्म जगत में इसकी चर्चा भी खूब होती है। तमन्ना की उत्तर भारतीय फिल्म वितरण क्षेत्रों में लोकप्रियता अभी है लेकिन इस लोकप्रियता को भुनाने की तरकीबें हिंदी सिनेमा के धुरंधरों के पास नहीं हैं। वेब सीरीज ‘नवंबर स्टोरी’ में भी तमन्ना ने मेहनत पूरी की है अपने अभिनय का रंग जमाने की। सीरीज में उन्हें गणेशन बने जी एम कुमार का अच्छा साथ मिला है। उनके अभिनय में मेलोड्रामा तो है पर ये दक्षिण की फिल्म मेकिंग की कमजोरी है। वहां कुछ भी सहज, सरल कम ही होता है। हालांकि पशुपति को अपने किरदार के ग्राफ के हिसाब से मौका नहीं मिला। उनका किरदार वाकई बहुत दिलचस्प बन सकता था। तकनीकी रूप से भी वेब सीरीज ‘नवंबर स्टोरी’ औसत से कमतर है। ना कैमरा कोई खास प्रभावित करता है और न ही बैकग्राउंड म्यूजिक। एडीटिंग सीरीज की सबसे बड़ी कमजोर कड़ी है।