Movie Review: एक्स्ट्रैक्शन
कलाकार: क्रिस हेम्सवर्थ, रणदीप हुड्डा, रुद्राक्ष जायसवाल, प्रियांशु पैन्यूली, पंकज त्रिपाठी आदि।
निर्देशक: सैम हार्गेव
ओटीटी: नेटफ्लिक्स
रेटिंग: **1/2
सिनेमा में जो भी, कोई भी काम करने आता है, ऐसा लगता है कि उसका आखिरी निशाना निर्देशक की कुर्सी ही होती है। रूसो ब्रदर्स के साथ बतौर स्टंट डायरेक्टर काम कर चुके सैम हार्गेव एवेंजर्स सीरीज की फिल्मों में कैप्टन अमेरिका यानी क्रिस इवान्स के बॉडी डबल का भी काम कर चुके हैं। और सिर्फ वही नहीं उनके भाई डैनियल भी एवेंजर्स सीरीज से शुरू से जुड़े रहे हैं और अगर आपने एवेंजर्स एंडगेम देखी है तो नए और पुराने कैप्टन अमेरिका भिड़ंत वाले सीन का कमाल इन दोनों भाइयों ने ही परदे पर करके दिखाया है।
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- फोटो : Mumbai, Amar Ujala
ये किस्सा इसलिए क्योंकि फिल्म एक्स्ट्रैक्शन का जो सबसे हाईलाइट प्वाइंट है वह क्रिस हेम्सवर्थ और रणदीप हुड्डा की करीब 10 मिनट चलने वाली डुएल फाइट ही है। ये अनकट सीन एक्स्ट्रैक्शन के एक्शन सीन्स को एक नई ऊंचाई तक भी ले जाता है और फिल्म के प्रचार में इस सीन की कहानी का बार बार सामने आना ये भी बताता है कि फिल्म में बताने को और कुछ खास है भी नहीं। एक सीन वाले पंकज त्रिपाठी यहां भारत के ऐसे माफिया सरगना बने हैं जिनके बेटे ओवी को बांग्लादेश का उनका प्रतिद्वंद्वी उठवा लेता है। भाड़े पर काम करने वाला टाइलर रेक इस बच्चे को अपराधियों के चंगुल से निकालने ढाका पहुंचता है और लाशों के ढेर बिछा देता है।
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- फोटो : Mumbai, Amar Ujala
फिल्म एक्स्ट्रैक्शन शुरू से लेकर आखिर तक बंदूकों, हेलीकॉप्टरों, गाड़ियों और इंसानी धमाकों की फिल्म है। कुछ कुछ मिथुन चक्रवर्ती की उन फिल्मों जैसी जो एक खास दर्शक वर्ग को तालियां और सीटियां बजाने के अलावा सिनेमा हॉल में चवन्नियां उछालने का मौका देती थीं। इस चवन्नी क्लास दर्शक वर्ग के लिए फिल्में बनाने का सेट फॉर्मूला हुआ करता था और उसी फॉर्मूले को बतौर निर्माता अपनी इस फिल्म में इस्तेमाल किया है रूसो ब्रदर्स ने।
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- फोटो : Mumbai, Amar Ujala
फिल्म एक्स्ट्रैक्शन अभिनय के लिहाज से देखी जाए तो क्रिस हेम्सवर्थ और रणदीप हुड्डा की फिल्म है। दोनों ने एक दूसरे को टक्कर तो दी ही है, काम भी टक्कर का किया है। और, दोनों के किरदार कमजोर पड़े हैं तो बस फिल्म की पटकथा के चलते। दोनों को अपने बेटों से प्यार है। टाइलर का बेटा एक बीमारी के चलते गुजर चुका है। साजू अपने बेटे से आखिरी बार फोन पर बात करते हुए मां का ख्याल रखने को कहता है। एक और बेटा फिल्म में है ओवी जिसका एक्स्ट्रैक्शन करने में दोनों लगे हुए हैं। फिल्म के ये तीनों इमोशनल ट्रैक बेहतर होते तो फिल्म भी बेहतरीन हो सकती थी लेकिन मार्वेल सीरीज की इतनी फिल्में निर्देशित करने के बाद भी जो रूसो पटकथा लिखते समय भावनाओं को उभार नहीं पाए। गनीमत है कि रुद्राक्ष की एक्टिंग बढ़िया है, नहीं तो एक दो सीन जो क्रिस और रुद्राक्ष की भावनाओं को चुराने की कोशिश करते हैं, वे भी बेकार हो जाते।
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- फोटो : Mumbai, Amar Ujala
फिल्म में इमोशन की कमी है, एक्शन की भरमार है। लाशें गिनना शुरू करेंगे तो कॉपी और पेन लेकर बैठना पड़ेगा। गिनती 90 के दशक के उन हिंदी फिल्मों के गानों की भी करना मुश्किल है जो फाइटिंग के सीन्स के बीच बांग्लादेश की गलियों में बजते हैं। प्रियांशु पैन्यूली बांग्लादेश के माफिया सरगना बने हैं। एक राजकुमार की तरह रहने वाला ये माफिया डॉन खुद मैदान में नहीं उतरता, बस पूरी राजधानी को महाभारत बना देता है। फिल्म एक्स्ट्रैक्शन पबजी खेलने वालों को खूब पसंद आएगी क्योंकि फिल्म का हीरो यहां वही कर रहा है, बस यहां गोलियां एक शहर की सड़कों पर चल रही हैं और कहानी का काल्पनिक लोक इसे वास्तविक बनाने की कोशिश करता रहता है। फिल्म भारतीय भाषाओं में भी रिलीज हुई है। डबिंग का स्तर यहां मार्वेल सीरीज की फिल्मों जैसा तो नहीं है, लेकिन मोबाइल पर कोरोना काल में टाइम पास के लिए ओके टाइप है।
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