डिजिटल रिव्यू: बुलेट्स (वेब सीरीज)
कलाकार: सनी लियोनी, करिश्मा तन्ना, दीपक तिजोरी, विवेक वासवानी, डैनियल वेबर आदि।
निर्देशक: देवांग ढोलकिया
ओटीटी: एमएक्स प्लेयर
रेटिंग: *
पिछले साल लंबे समय तक ये चर्चा चलती रही कि ई कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट शायद एमएक्स प्लेयर को खरीद ले। अमेजन के प्राइम वीडियो से टक्कर लेने के लिए फ्लिपकार्ट अपने वीडियोज बना भी रहा है लेकिन उसको एक दमदार लाइब्रेरी की जरूरत है। और, यहीं आकर एमएक्स प्लेयर की पोल खुल जाती है। उसके पास पोर्न और सेमी पोर्न सीरीज का खजाना है, बस ढंग के कंटेंट की लाइब्रेरी नहीं है। मुफ्त का ओटीटी है और भारत में लोगों को अभी ये समझना बाकी है कि जो उत्पाद उन्हें मुफ्त में मिलता है, दरअसल वह उसे पाने वाले को एक उत्पाद में बदल रहा होता है।
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बुलेट्स
- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
तो डाटा खर्च करने वाले उत्पाद में बदलते गांव, देहात, कस्बों और शहरों के ऐसे दर्शकों के लिए एमएक्स प्लेयर लेकर आया है अपनी नई वेब सीरीज ‘बुलेट्स’, जो मोबाइल पर अकेले में सिर्फ ऐसे वीडियो देखते रहते हैं, जिन्हें देखने की हिम्मत वह शायद ही परिवार के साथ करें। अकेले में देखने के लिए और भी सामग्री ओटीटी पर उपलब्ध है, लेकिन वहां दिमाग चाहिए होता है। तो दर्शकों को उत्तेजित करने, उन्हें रस माधुरी के दर्शन कराने और बीच बीच में थोड़ा बहुत एक्शन दिखा देने के लिए इस बार बारी है सनी लियोनी और करिश्मा तन्ना की।
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वेब सीरीज ‘बुलेट्स’ दरअसल सात साल पहले बननी शुरू हुई फिल्म ‘टीना और लोलो’ का ही टुकड़े टुकड़े रूप है। आने वाली मई में 40 साल की होने जा रही सनी लियोनी को ये पता है कि उनका रूप लावण्य जा चुका है। जो कुछ वह अपने बदन से कमा सकती थीं, वह कमा चुकी हैं, अब जो कमा रही हैं, वह बोनस है। सीरीज में वह एक एनआरआई मॉडल टीना के रोल में हैं जिनकी मुलाकात लोलो से इत्तेफाकन हो जाती है। लोलो मिशन पर है और इस मिशन में उसे भ्रष्ट गृह मंत्री और उसके गुर्गों के इरादों का पर्दाफाश करना है। टीना उसके साथ हो लेती है। दोनों को असल में तो छुपते छिपाते अपना मिशन अंजाम देना है, लेकिन परदे पर वो कुछ भी छुपाने के मूड में तो पूरी सीरीज में नहीं दिखती हैं।
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- फोटो : अमर उजाला, मुंबई
सनी लियोनी को भारतीय मनोरंजन इंडस्ट्री में प्रवेश दिलाने का श्रेय आलिया भट्ट के पिता महेश भट्ट को जाता है। सनी लियोनी की छाया पड़ने के बाद से मुंबई के ओशिवारा और महाडा कॉम्प्लेक्स में पोर्न सिनेमा की इतनी बड़ी इंडस्ट्री विकसित हो चुकी है कि उसके आगे मुंबई की मुख्य फिल्म इंडस्ट्री के बौना दिखने में ज्यादा समय नहीं बचा है। वेब सीरीज ‘बुलेट्स’ भी इसी नर्सरी से निकली कहानी है।
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सीरीज ‘बुलेट्स’ एक फिल्म के छह टुकड़े हैं। वैसे ही जैसे इसके पहले ‘जेएल 50’ और ‘डैंजरस’ के हो चुके हैं। फिल्म जिस दर्शक वर्ग के लिए बनी है, उसको प्राप्त भी हो चुकी है। लेकिन सिनेमा के लिहाज से ये फिल्म देखना और इस पर समय लगाना मानसिक और शारीरिक तनाव से ज्यादा कुछ नहीं है। न फिल्म की कहानी ढंग की है और न ही इसका निर्देशन। वीडियो संपादन भी बहुत बेतरतीब है।