बॉडी बिल्डिंग में चार बार मिस्टर यूनिवर्स और सात बार मिस्टर ओलंपिया रह चुके दुनिया के सबसे मशहूर अभिनेताओं में से एक अर्नाल्ड श्वार्जेनेगर का जीवन किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है। वह अमेरिका में कैलिफोर्निया राज्य के गवर्नर रह चुके हैं और उनके नाम पर दक्षिणी कैलिफोर्निया यूनीवर्सिटी में एक संस्थान भी चलता है। 1984 में रिलीज हुई टर्मिनेटर से मेगा स्टार बने अर्नाल्ड का ये किरदार अगले हफ्ते दुनिया भर में रिलीज हो रही इसी सीरीज की अगली फिल्म टर्मिनेटर डार्कफेट से बड़े परदे पर फिर लौट रहा है। अमर उजाला ने अर्नाल्ड से ये खास मुलाकात दक्षिण कोरिया की राजधानी सियोल में की।
EXCLUSIVE: अर्नाल्ड ने लीक की टर्मिनेटर डार्कफेट के सबसे खतरनाक सीन की डिटेल
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आपको करीब चार दशक हो रहे हैं सिनेमा में काम करते हुए। कितना फर्क आया है तब की और आज की एक्शन फिल्मों में?
काम करने के नजरिए से देखें तो सब कुछ वही है। एक अभिनेता को अब भी सेट पर पूरी तैयारी के साथ आना होता है। हथियारों के साथ शूटिंग से पहले लंबे समय तक ट्रेनिंग करनी होती है। लेकिन, परदे पर एक मशीन का किरदार करने में 1984 से लेकर 2019 तक जो बदलाव आया है, वो ये है कि अब आप दर्शकों का बेहतर तरीके से मनोरंजन कर सकते हैं और इसमें स्पेशल इफेट्क्स की तकनीक में हुए विकास ने बहुत मदद की है। जो काम हम शूटिंग करके नहीं कर सकते, उसकी भरपाई अब हम स्पेशल इफेक्ट्स से कर सकते हैं।
फिल्म टर्मिनेटर डार्कफेट के ऐसे किसी सीन के बारे में बताना चाहेंगे जो शायद पहले करना मुमकिन नहीं होता लेकिन तकनीक के सहारे इस फिल्म में उसे रचने में इसकी टीम कामयाब रही?
फिल्म टर्मिनेटर डार्कफेट में एक सीन है जिसमें एक जहाज में आग लगने के बाद वह आसमान से धरती की तरफ गिर रहा है और उसके भीतर फिल्म के विलेन से जबर्दस्त लड़ाई चल रही है। इस सीन में गुरुत्वाकर्षण क्षमता शून्य है यानी कि किरदार हवा में तैर रहे हैं और आपस में लड़ भी रहे हैं। जीरो ग्रैविटी में ऐसे सीन फिल्माया जाना पहले शायद संभव नहीं था। इस बार भी ये आसान नहीं रहा। इस सीन को पूरा करने में हमें तीन से चार हफ्तों का समय लगा। हम लोगों को तार के सहारे लटकाया गया था। हमारे चारों तरफ जहाज का ढांचा था और हम इधर से उधर हवा में बह रहे थे। बहुत मुश्किल था ये सब कहना, कई बार तो हमें शूटिंग रोक देनी होती थी क्योंकि हमारी प्राकृतिक प्रतिक्रियाएं भटकने लगती थीं। तो अब जहां कहीं भी अभिनेता की मेहनत कम पड़ जाती है वहां मदद करने के लिए स्पेशल इफेक्ट्स आ जाते हैं। तकनीक के विकास से हम दर्शकों का बेहतर मनोरंजन कर पाने में सफल हो रहे हैं।
हां, आप सही कह रहे हैं। हर टर्मिनेटर फिल्म में मेरे किरदार के साथ ऐसा होता है। पहली टर्मिनेटर में सारा कॉनर मेरे किरदार को मशीन से कुचल देती है। फिर दूसरी टर्मिनेटर में मैं पिघलते हुए लावा में समा जाता हूं। इस बार क्या हो रहा है, ये दर्शकों को फिल्म देखकर पता चलेगा लेकिन इन फिल्मों की कहानियां ही इस तरह से लिखी गई हैं। मेरे किरदार यानी टर्मिनेटर 800 का परदे पर वापस लौटना दर्शकों पर निर्भर करता है। वहीं फिल्म का सीक्वेल बनाने का कारण बनते हैं। अगर दुनिया भर के दर्शकों को ये फिल्म पसंद आई और अगर जेम्स कैमरॉन को लगेगा तो हम इसकी भी सीक्वेल जरूर बनाएंगे।
टर्मिनेटर सीरीज की पहली दोनों फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई के रिकॉर्ड बनाए हैं। टर्मिनेटर डार्कफेट की कहानी उन्हीं दोनों फिल्मों के आगे से शुरू होती है, क्या आप वाकई बॉक्स ऑफिस के आंकड़ों को तरजीह देते हैं?
मैं अपनी किसी भी फिल्म से कोई उम्मीद नहीं रखता। ये हो भी नहीं सकता। जैसे कि राजनीतिक रैलियों में होता है। चुनाव के वक्त आपको पता नहीं होता कि इनका नतीजा क्या होगा। इसी तरह से फिल्में हैं, आपको पता नहीं होता कि नतीजा क्या होगा। लेकिन मैं आपको ये जरूर बता सकता हूं कि पूरे अमेरिका में हमने टर्मिनेटर डार्क फेट की तमाम टेस्ट स्क्रीनिंग्स कीं और इनमें आए लोगों की प्रतिक्रिया जबर्दस्त रही। इस फिल्म को लेकर मैं वैसे भी बहुत खुश हूं क्योंकि इसमें सारा कॉनर का किरदार करने लिंडा हैमिल्टन वापस लौटी हैं।