मलयालम फिल्म निर्देशक रोशन एंड्रूज की हिंदी सिनेमा में पैठ बनाने की पहली कोशिश ‘देवा’ पहले दिन के कलेक्शन के हिसाब से नाकाम होती नजर आ रही है। शाहिद कपूर के लिए ये आंकड़े उससे ज्यादा बड़ा अपशकुन हैं। फिल्म अभिनेता शाहिद कपूर की जब एक के बाद एक फिल्में बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो रही थीं तो ‘अर्जुन रेड्डी’ बनाने वाले निर्देशक संदीप रेड्डी वंगा ने उन्हें अपनी इस हिट तेलुगु फिल्म के हिंदी रीमेक में ‘कबीर सिंह’ बनाकर पेश किया और दोनों ने मिलकर बॉक्स ऑफिस पर चांदी काटी। संदीप इसके बाद ‘एनिमल’ बनाने निकल गए और शाहिद की तिजोरी ‘फर्जी’, ‘ब्लडी डैडी’ और ‘तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ जैसी फिल्मों ने भर दी। संदीप ने पैसा और नाम दोनों कमाया। शाहिद ने पैसा तो ‘कबीर सिंह’ के बाद दोनों हाथों से बटोरा है लेकिन उनका नाम कितना हुआ है, आइए समझने की कोशिश करते हैं।
Deva Review: गुस्से के ‘कबीर सिंह’ वाले स्थायी भाव में दिखा ‘देवा’, मलयालम क्लासिक की सस्ती मुंबइया रीमेक
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देवा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अभिनेता पंकज कपूर और अभिनेत्री नीलिमा अजीम के बेटे शाहिद कपूर ने लंबे समय तक हिंदी फिल्मों मे हीरो के पीछे नाचने वाले समूहों में नृत्य किया है। साल 2003 में फिल्म ‘इश्क विश्क’ से उनका सिक्का बॉक्स ऑफिस पर चल निकला और बीते 22 साल से वह हिंदी सिनेमा में सक्रिय है। ओटीटी पर वह ‘फर्जी’ वेब सीरीज और फिल्म ‘ब्लडी डैडी’ में दिख चुके हैं। ‘फर्जी’ में उनका काम औसत रहा। सीरीज चर्चा में रही लेकिन इसने उनकी सिनेमाई छवि को कमजोर किया। फिल्म ‘ब्लडी डैडी’ का खास फायदा शाहिद को मिला नहीं। फिल्म अच्छी बनी लेकिन सीधे ओटीटी पर रिलीज हो गई। अब बारी ‘देवा’ की है, लेकिन रोशन की अपनी ही फिल्म ‘मुंबई पुलिस’ की इस हिंदी रीमेक का असर टिकट खिड़की पर दिख नहीं रहा।
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देवा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
शाहिद कपूर के बीते 10 साल के करियर पर अगर नजर डालें तो इन 10 साल में उनके खाते में सिर्फ दो सुपरहिट या कहें कि ब्लॉकबस्टर फिल्में दर्ज हैं, 2018 में आई संजय लीला भंसाली की फिल्म ‘पद्मावत’ और कोरोना काल के ठीक पहले 2019 में आई फिल्म ‘कबीर सिंह’। इन फिल्मों ने बॉक्स ऑफिस पर तो शानदार कारोबार किया ही, हिंदी फिल्म के आम दर्शकों ने भी फिल्म की तारीफ की और शाहिद के अपने प्रशंसकों को ये दोनों फिल्में खूब पसंद आईं। लेकिन, फिल्म ‘देवा’ का मामला बॉक्स ऑफिस पर डांवाडोल नजर आ रहा है। करीब चार हजार स्क्रीन्स पर रिलीज हुई शाहिद कपूर की इस फिल्म का कुल बजट (मेकिंग और प्रचार लागत) करीब 80 करोड़ रुपये बताया जा रहा है। शनिवार सुबह तक के आंकड़ों के मुताबिक ये फिल्म पहले दिन सिर्फ पांच करोड़ रुपये कमा पाई है।
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देवा
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
‘देवा’ से पहले बीते एक डेढ़ दशक की शाहिद की 10 फिल्मों पर नजर डालें तो ये भी समझ आता कि उनकी फिल्मों की पहले दिन की ओपनिंग से ही उनकी फिल्मों का भविष्य टिकट खिड़की पर तय हो जाता है। आमतौर पर किसी फिल्म के अपने बजट का 20 फीसदी के करीब पहले दिन कमा लेने से फिल्म का भविष्य उज्ज्वल माना जाता है। और, इससे कम कमाई होने पर मामला गंभीर होने लगता है। फिल्म का पहले दिन का कलेक्शन अगर फिल्म के बजट के 10 फीसदी से भी कम है तो फिल्म का उबर पाना बहुत मुश्किल माना जाता है। इस मामले में ‘देवा’ की पहले दिन की ओपनिंग इसके रिलीज बजट का 10 फीसदी भी नहीं है।
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जर्सी
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
फिल्म ‘देवा’ के पहले दिन के कलेक्शन की बात करने के साथ ही समझ लेते हैं कि शाहिद की पिछली 10 फिल्मों में फ्लॉप फिल्में मानी गईं ‘जर्सी’, ‘बत्ती गुल मीटर चालू’, ‘रंगून’ और ‘शानदार’ का कारोबार कैसा रहा? ये चार फिल्में शाहिद कपूर की स्पष्ट फ्लॉप फिल्में हैं। इसके अलावा शाहिद की पिछली 10 फिल्मों में से चार और फिल्मों ‘आर राजकुमार’, ‘हैदर’, ‘उड़ता पंजाब’ और तेरी बातों में ऐसा उलझा जिया’ का कारोबार भी बहुत उत्साहजनक नहीं रहा। ये चारों फिल्में किसी तरह टिकट खिड़की पर अपने बजट जितना कारोबार या उससे थोड़ा ज्यादा कमाई ही कर सकीं और औसत कामयाब फिल्में कहलाईं।