इस साल साध्वी सैल के सिर पर मिस इंडिया का ताज सजा है। इन दिनों वह काफी चर्चा में हैं। अमर उजाला डिजिटल से की गई एक लंबी बातचीत में उन्होंने बताया कि पेजेंट में आने से पहले उनका वजन 10 किलो ज्यादा था। इसे उन्होंने कैसे मेंटेन किया? क्या है साध्वी सैल का फिटनेस और लाइफस्टाइल मंत्रा, जानिए उनकी ही जुबानी-
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साध्वी सैल ने जीता मिस इंडिया 2026 का खिताब
- फोटो : अमर उजाला
लाइफस्टाइल बदलने की जरूरत होती है
मेरा वजन लगभग 10 किलो ज्यादा था, लेकिन बात सिर्फ वजन की नहीं थी। मुझे महसूस होने लगा था कि मैं धीरे-धीरे गलत आदतों की तरफ जा रही हूं। मैं ज्यादा सुस्त हो गई थी, अपने प्लान कैंसिल करने लगी थी, बाहर जाना कम हो गया था। तभी मुझे लगा कि लाइफस्टाइल बदलना जरूरी है। यह मेरे लिए एक तरह का वेक अप कॉल था। मुझे फिर से कॉन्फिडेंट महसूस करना था।
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साध्वी सैल
- फोटो : इंस्टाग्राम@sailsadhvi
छोटे-छोटे बदलाव ही सबसे बड़ा फर्क लाते हैं
मैंने छोटे-छोटे बदलावों से शुरुआत की। अपनी बॉडी को समझना शुरू किया। खाने से पहले थोड़ा एप्पल साइडर विनेगर लिया। स्ट्रेंथ ट्रेनिंग की और साथ में वॉक को अपनाया। मैंने यह भी सुनिश्चित किया कि मैं रोज करीब 10 हजार कदम चलूं। इसके साथ ही मैंने अपनी नींद पर ध्यान देना शुरू किया, क्योंकि मुझे पहले यह समझ ही नहीं था कि आराम कितना जरूरी है। मैं पहले सात दिन जिम जाती थी, लेकिन बाद में इसे चार-पांच दिन तक सीमित किया, रिकवरी को भी उतनी ही अहमियत दी। मैंने प्रोटीन इंटेक पर भी ध्यान दिया। लेकिन मैं हमेशा कहती हूं कि यह सब मेरे लिए काम कर गया, हर किसी के लिए तरीका अलग हो सकता है।
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साध्वी सैल
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दोस्तों की वजह से मंजिल हासिल की
मेरे लिए सबसे बड़ा फर्क यह था कि मैंने यह सब अकेले नहीं किया। मैंने अपने दोस्तों से कहा कि मैं खुद को बेहतर महसूस करना चाहती हूं, उन्होंने भी मेरा साथ दिया। हमने एक छोटा सा रूटीन बना लिया था, पहले एक कैफे में मिलते थे, कॉफी लेते थे, फिर जिम जाते थे। उसके बाद अपने अपने घर चले जाते थे। इसी चीज ने मेरी फिटनेस जर्नी को मजेदार बनाया।
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साध्वी सैल
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मैं कभी बिंज ईटर भी थी
मुझे सिनेमा बहुत पसंद है। मैं घंटों तक फिल्में और सीरीज देख सकती हूं। इसके साथ एक और आदत जुड़ी हुई थी। मैं लगातार कुछ न कुछ खाती रहती थी, बिना सोचे-समझे। फिर मैंने खुद को समझाया कि मुझे यह आदत बदलनी होगी। मैंने तय किया कि मैं बिना वजह स्नैकिंग नहीं करूंगी और सही समय पर खाना खाऊंगी।
अगर मुझे कुछ मीठा खाना भी होता था, तो मैं उसे खाने के बाद ही खाती थी, जिससे शरीर पर उसका असर कम हो। यह छोटा सा बदलाव मेरे लिए बहुत बड़ा गेम चेंजर साबित हुआ। ईमानदारी से कहूं तो डिसिप्लिन सबसे जरूरी है।