तबले को वैश्विक मंच पर ले जाने वाले 73 वर्षीय संगीतकार जाकिर हुसैन का अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को के एक अस्पताल में निधन हो गया। यह दुखद सूचना उनके परिवारजनों ने सोमवार को दी, जिसे सुनने के बाद मशहूर तबला वादक उस्ताद जाकिर हुसैन के सभी प्रशंसक शोक में डूब गए।
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दिवंगत जाकिर हुसैन
- फोटो : इंस्टाग्राम@zakirhq9
दिवंगत जाकिर हुसैन के निधन के बाद परिवार ने एक बयान जारी किया और कहा कि हुसैन की मृत्यु इडियोपैथिक पल्मोनरी फाइब्रोसिस की वजह से हुई। दिवंगत तबला वादक जाकिर के निधन पर पश्चिम बंगाल के कई संगीतकारों ने शोक जताया है।
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दिवंगत जाकिर हुसैन
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संतूर कलाकार पंडित तरूण भट्टाचार्य ने कहा, "कोई दूसरा जाकिर हुसैन नहीं हो सकता। वह शास्त्रीय संगीत की दुनिया में आखिरी मोहिकन में से एक थे। हुसैन ने कई शास्त्रीय रागों और शैली में तबला बोल (लय) के साथ कई प्रयोग किए। यही वजह है कि तबला उनके हाथ के नीचे बोलता था।''
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दिवंगत जाकिर हुसैन
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तरूण भट्टाचार्य ने जाकिर को याद करते हुए कहा कि वह (जाकिर) किसी भी प्रदर्शन से पहले मंच पर मौजूद बड़ों के पैर छूते थे। वह वही व्यक्ति थे, जिन्होंने भारतीय तबले को दुनिया के सामने अलग पहचान दिलाई और भारतीय शास्त्रीय वाद्य संगीत को बीटल्स के बराबर बनाया।
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दिवंगत जाकिर हुसैन
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ग्लोबल इंडियन म्यूजिक एकेडमी अवार्ड विजेता और ग्रैमी के जूरी सदस्य, तबला कलाकार प्रद्युत मुखर्जी ने जाकिर हुसैन को एक बहुमुखी इंसान बताया, जो मंच पर एक महान कलाकार थे। प्रद्युत मुखर्जी ने आगे कहा, "मैं उन्हें एक गुरु के रूप में मानता हूं। हालांकि, वह आधिकारिक तौर पर मेरे गुरु नहीं थे। मैंने उनसे लय और ताल सीखी थी और वह हमेशा बहुत विनम्र स्वभाव के थे। वह कभी भी नए लोगों के लिए अहंकार नहीं दिखाते थे। जाकिर हुसैन हमेशा उभरती प्रतिभाओं की मदद करने के लिए तैयार रहते थे।" प्रद्युत मुखर्जी ने कहा, "जाकिर जी दक्षिण कोलकाता में एक तबला निर्माता की दुकान पर जाते थे और उनके वाद्ययंत्र का इस्तेमाल यहां और विदेशों में अपने प्रदर्शन के लिए करते थे।"