भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े नामों में से एक एसएस राजमौली दो दशक से अधिक समय से फिल्में बना रहे हैं। यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि उन्होंने ‘बाहुबली’ फिल्म की बदौतल वैश्विक जनता की नजरों में अकेले ही तेलुगु सिनेमा को आगे बढ़ाया है। राजामौली ने आज तक कई बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं, लेकिन एक असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर अपने करियर की शुरुआत करने वाले राजामौली भारत के सबसे बड़े डायरेक्टर कैसे बने, यहीं हम आज आपको बताने जा रहे हैं।
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एस एस राजामौली
- फोटो : gulte
राजामौली का जन्म 10 अक्टूबर 1973 को दक्षिण भारतीय स्क्रिप्टराइटर के.वी विजयेंद्र प्रसाद और राजा नंदिनी के घर हुआ था। उनका पूरा नाम कोदुरी श्रीसैला राजामौली है। उन्होंने अपने करियर की शुरुआत ईटीवी तेलुगु के एक शो से की थी। तब वह के.रघुवेंद्र राव के साथ असिस्टेंट डायरेक्टर हुआ करते थे। राजामौली ने उन्हीं से निर्देशन सीखा और वह उन्हें अपना मेंटर बताते हैं।
टेलीविजन में कुछ समय काम करने के बाद, जब उन्हें अनुभव मिल गया तो उन्होंने 2001 में बड़े पर्दे की और रुख किया। उन्होंने जूनियर एनटीआर के साथ फिल्म ‘स्टूडेंट नंबर 1’ बनाई और एक निर्देशक के रूप में फिल्मी दुनिया में कदम रखा। अपने करियर के शुरुआत के बाद से, राजामौली कभी भी एक के बाद एक फिल्म बनाने की जल्दी में नहीं रहे। ‘स्टूडेंट नंबर 1’ हिट साबित हुई, लेकिन उसके बाद उनकी दूसरी फिल्म ‘सिम्हाद्री’ आने में दो साल का समय लग गया। इसके बाद उन्होंने 2004 में नितिन और जेनेलिया डिसूजा स्टारर ‘सई’ के बनाई, जो भी सफल साबित हुई।
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विक्रमार्कुडु और राउडी राठौर
- फोटो : सोशल मीडिया
इसके बाद साल 2005 में राजामौली की प्रभास के साथ 'छत्रपति' आई, जिसने उन्हें प्रसिद्धी दिलाई। अपनी हर फिल्म के साथ राजामौली एक आकर्षक पटकथा के साथ कहानी को एक बेहतर ढंग से पेश करने लगे। राजामौली के पिता फिल्म की कहानी पर काम करते और वो अपनी कल्पना के माध्यम के काहनी में जान डाल देते। उन्होंने 2006 में ‘विक्रमार्कुडु’ में रवि तेजा के साथ काम किया, जिसने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया। इसके बाद ‘विक्रमार्कुडु’ का तमिल में ‘सिरुथाई’, हिंदी में ‘राउडी राठौर’ और कन्नड़ में ‘वीरा मदकारी’ नाम से रीमेक बनाया गया। ये सभी फिल्में ब्लॉकबस्टर साबित हुई।
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मगधीरा और ईगा
- फोटो : सोशल मीडिया
राजामौली की फिल्मों की खास बात यह भी है कि वह अपनी फिल्मों में खुद भी कोई न कोई किरदार जरूर निभाते हैं और स्क्रीन पर अपनी मौजूदगी दर्ज कराते हैं। साल 2009 में आई 'मगधीरा' और 2012 में आई 'ईगा' (मक्कखी) से उन्होंने अपनी अलग पहचान बना ली। 'ईगा' फिल्म के बाद राजामौली को ऐसे निर्देशक के रूप में देखा जाने लगा जो एकदम हटकर फिल्में बनाते हैं। एसएस राजामौली को साल 2016 में पद्म श्री से भी नवाजा जा चुका है।