रामानन्द सागर की रामायण में जो मधुर आवाज आपने सुनी वह रवीन्द्र जैन की है। रवीन्द्र जैन बचपन से ही नेत्रहीन थे लेकिन संगीत के प्रति उनका खास लगाव था। आज रवीन्द्र जैन की पुण्यतिथि है। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले में जन्में रविंद्र जैन सात भाई-बहनों में तीसरे नंबर के थे। 1972 में उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत की। उन्होंने न सिर्फ अच्छा गाया बल्कि एक से बढ़कर एक संगीत भी दिया। उन्होंने बॉलीवुड के कई प्रसिद्ध गीत लिखे भी हैं। जानें कौन से हैं वह गीत जो उन्होंने लिखे भी और संगीत भी दिया।
'अंखियों के झरोखों' से लेकर 'कौन दिसा में' तक सुनिए रवीन्द्र जैन के ये पांच गीत
नदिया के पार (1982)
कौन दिसा में ले के चला रे बटुहिया
ए ठहर-ठहर, ये सुहानी सी डगर
जरा देखन दे, देखन दे
अंखियों के झरोखों से (1978)
अंखियों के झरोखों से, मैंने देखा जो सांवरे
तुम दूर नज़र आए, तुम (बड़ी) दूर नज़र आए
बंद करके झरोखों को, जरा बैठी जो सोचने
मन में तुम्हीं मुस्काए, मन में तुम्हीं मुस्काए
अँखियों के झरोखों से...
विवाह (2006)
मुझे हक है
तुझको जी भर के मैं देखूं
मुझे हक है
बस यूँ ही देखता जाऊँ
मुझे हक है
पिया-पिया
पिया-पिया बोले मेरा जिया
राम तेरी गंगा मैली (1985)
सुन साहिबा सुन
प्यार की धुन
हो मैंने तुझे चुन लिया
तू भी मुझे चुन
सुन साहिबा सुन...