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Parag Desai: हिट्स की हैट्रिक पर पराग देसाई का खुलासा, ‘व्यक्तिगत संवाद हमारी यूएसपी, व्हाट्सएप-ईमेल काम नहीं करते’
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हिंदी सिनेमा बदल रहा है। बड़े बड़े सितारों को भी अब ये समझ आ रहा है। दमदार कहानियों के रीमेक बनाए जा रहे हैं। दक्षिण और उत्तर का फर्क मिट रहा है और साथ ही बदल रहा है सिनेमा के दर्शकों तक किसी भी फिल्म को पहुंचाने का तरीका। साल 2020 की सबसे बड़ी हिट फिल्म ‘तानाजी द अनसंग वॉरियर’ को देश के घर घर तक पहुंचाने का बीड़ा उठाने वाले यूनीवर्सल कम्यूनिकेशंस के सीईओ पराग देसाई ने बीते साल एक नया रिकॉर्ड बनाया है। देश में सबसे ज्यादा कारोबार करने वाली हिंदी फिल्म ‘सूर्यवंशी’ की दमक दसों दिशाओं में तो उन्होंने फैलाई ही। दुनिया में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म ‘स्पाइडरमैन नो वे होम’ के भारत में रिलीज हुए हिंदी और अंग्रेजी संस्करणों की रिलीज से पहले और बाद की प्रचार रणनीति भी उनकी टीम ने बनाई। और, सबसे बड़ा धमाका पराग की टीम ने किया फिल्म ‘पुष्पा पार्ट वन’ के साथ जिसके हिंदी संस्करण के कारोबार ने बड़े बड़े दिग्गजों को हिला दिया है। पराग कहते हैं, ‘हमारा काम सिनेमा बनाने वालों और दर्शक के बीच संवाद स्थापित करना होता है और ये कभी एकतरफा नहीं हो सकता।
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- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
हिंदी सिनेमा में संवाद की कमी लगातार महूसस की जाती रही है। नए दौर में आई प्रचार प्रसार की नई पीढ़ी व्हाट्सऐप और मेल पर ही अपना काम खत्म मान लेती है। पराग कहते हैं, ‘हम इसके आगे की प्रक्रिया पर ज्यादा जोर देते हैं। कोई जरूरी नहीं है कि जिसे हमने व्हाट्सऐप या ईमेल भेजा है, वह सिर्फ इसे पढ़ने के लिए ही खाली बैठा हो। दिन में हजार हजार मेल पाने वाले लोगों के पास हमारी मेल पढ़ी जाए, हम इसे तय करते हैं। हमारी टीम व्यक्ति से व्यक्ति के संवाद पर जोर देती है। संवाद में आवाज का महत्व शुरू से रहा है और आगे भी रहेगा। हमारी टीम सभी लोगों से खुद बात करती है और उनसे मिले फीडबैक को वापस फिल्म निर्माताओं तक पहुंचाती है। और, इसी रणनीति ने ‘पुष्पा पार्ट 1’ के हिंदी संस्करण को रिलीज के बाद हफ्ते दर हफ्ते बॉक्स ऑफिस कमाई बढ़ाने में मदद की।
लगातार दो साल सबसे ज्यादा कमाई करने वाली हिंदी फिल्मों की प्रचार रणनीति के सूत्रों का खुलासा करते हुए पराग बताते हैं, ‘निर्माता निर्देशक रोहित शेट्टी हमेशा कहते हैं कि उपलब्ध संसाधानों का एक नियत समय में सबसे बेहतर उपयोग ही किसी फिल्म के लिए सही संवाद की दिशा है। आसान भाषा में कहना हो तो यही कि दर्शक को फिल्म की रिलीज के ठीक पहले तक हम फिल्म के बारे में कितनी अलग अलग बातें कम से कम समय में बता सकते हैं, उसी पर पूरा प्रचार निर्भर रहता है। यूनीवर्सल कम्यूनिकेशन में हमारा काम मुंबई, दिल्ली, कोलकाता जैसे बडे शहरों के साथ बरेली, मेरठ, रोहतक, देहरादून जैसे दूसरी और तीसरी श्रेणी के शहरों में रहने वाले दर्शकों के बीच तक फिल्म को लेकर उत्सुकता जगाना है।
फिल्म ‘सूर्यवंशी’ की चर्चा चलने पर पराग कहते हैं, ‘रिलायंस एंटरटेनमेंट की मार्केटिंम टीम ने इसकी रणनीति तैयार की। हमें फिल्म की रिलीज से पहले कम से कम दिन में ज्यादा से ज्यादा प्रचार इस फिल्म का करना था। रोहित शेट्टी खुद संवाद के मास्टर हैं तो उनके दिशा निर्देशों के हिसाब से ही हमने इस पूरे प्रचार की योजना बनाई। पत्रकारों से बात की और उन्हें फिल्म का संदेश समझाया। यहां खास बात नोट करने लायक ये है कि हमारी कंपनी में काम करने वाले हर कर्मचारी को पत्रकारों को पूरे सम्मान की सीख दी जाती है। वह छोटा हो या बड़ा, हमारी टीम सबके व्यक्तिगत संपर्क में रहती है और सिर्फ व्हाट्सऐप या मेल करके चुप नहीं बैठ जाती। व्यक्तिगत संवाद ही हमारी यूएसपी है। सिनेमा कारोबार में व्हाट्सऐप और ईमेल काम नहीं आते।’
हॉलीवुड की धमाकेदार फिल्म ‘स्पाइडरमैन नो वे होम’ को लेकर हिंदीभाषी क्षेत्रों में जो माहौल बना उसके लिए भी यूनीवर्सल कम्यूनिकेशन्स ने खासी मेहनत की। इसके लिए पराग डिज्नी इंडिया की पूरी टीम को इसका श्रेय देते हैं। वह कहते हैं, ‘सिनेमा दृश्य श्रव्य माध्यम है यानी ऑडियो विजुअल। और, इसका एहसास हमारे संदेश में तब तक नहीं हो सकता जब तक कि हम फिल्म के बारे में लिखने वाले से खुद बात नहीं करेंगे। आपका कहना सच है कि तमाम नए लोगों ने लिखित संदेशों को ही प्रचार प्रसार का माध्यम बना लिया है लेकिन यह परंपरा सिनेमा के लिए बहुत घातक है।’
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