बॉलीवुड में कई ऐसी हीरोइनें आईं जिन्होंने अपनी एक्टिंग के दम पर पहचान बनाई । जब तक वो पर्दे पर दिखीं तब तक तो खूब वाह-वाही लूटी । जहां एक-दो फिल्में फ्लॉप हुईं, दर्शकों के दिल से भी उतर गईं । 80 के दशक में माला सिन्हा ऐसी ही हीरोइनों में से एक थीं । माला सिन्हा ने बॉलीवुड में कदम रखते ही एक के बाद एक कई हिट फिल्में दीं । हुस्न और एक्टिंग के हुनर से उन्होंने कई सालों तक दर्शकों के दिल पर राज किया ।
आज माला सिन्हा अपना 82वां बर्थडे मना रही हैं । अपने करियर में ज्यादातर हिट फिल्में देने वाली माला सिन्हा ने पांच दशक तक सिनेमा जगत में काम किया। अब वो लंबे समय से लाइम लाइट से दूर हैं । कभी-कभी किसी इवेंट में दिख जाती हैं । नेपाल में जन्मीं माला जब अपने शुरुआती दौर में एक बॉलीवुड प्रोड्यूसर से मिलीं तो उन्होंने माला की खूब बेइज्जती की थी। प्रोड्यूसर ने कहा कि पहले शीशे में जाकर अपना चेहरा तो देखो।
ऐसी भद्दी नाक को लेकर हीरोइन बनने का सपना देखती हो। लेकिन इसके बाद भी माला ने बॉलीवुड में अपना सिक्का जमा ही लिया। माला के पिता अल्बर्ट सिन्हा बंगाल से थे। इसी कारण लोग उन्हें नेपाली-भारतीय बाला कहते थे। उनकी मां नेपाल की रहने वाली थीं। माला के बचपन का नाम आल्डा था। जब वो स्कूल जाती थीं तो उनके दोस्त उन्हें डालडा कहकर चिढ़ाते थे। वहीं माला के माता-पिता उन्हें बेबी कहते थे। इसलिए कई दोस्त उन्हें डालडा सिन्हा तो कई बेबी सिन्हा कहने लगे।
माला को ये दोनों ही नाम बिलकुल पसंद नहीं थे। फिर आल्डा ने अपना नाम बदलकर माला सिन्हा रख लिया। उन्होंने फिल्मों की शुरुआत बंगाली फिल्मों से की थी। एक बार जब वो फिल्म के सिलसिले में मुंबई आईं तो यहां उनकी मुलाकात उस जमाने की फेमस एक्ट्रेस गीता बाली से हुई। उन्होंने ही माला को डायरेक्टर केदार शर्मा से मिलवाया। केदार शर्मा को माला बहुत पसंद आईं और उन्होंने अपनी फिल्म 'रंगीन रातें' में बतौर अभिनेत्री काम दिया।
कहा जाता है कि माला सिन्हा को बॉलीवुड में स्थापित करने वाले केदार शर्मा ही हैं। फिल्मों में काम करने से पहले माला रेडियो के लिए गाती थीं। माला बेहद खूबसूरत थीं इसलिए किसी ने उन्हें फिल्मों में काम करने की सलाह दी। सलाह मानकर माला मुंबई आ गईं। यहां उन्हें पहली फिल्म के लिए काफी इंतजार करना पड़ा। एक प्रोड्यूसर ने तो माला को उनकी नाक को लेकर काफी बेइज्जत किया था।