गुजरे जमाने के एक्टर और सिंगर कुंदनलाल सहगल यानी केएल सहगल ने महज 15 साल के फिल्मी करियर में ऐसी छाप छोड़ी कि आज भी उन्हें याद किया जाता है। 18 जनवरी को केएल सहगल की डेथ एनिवर्सिरी है। चलिए जानते हैं उनकी जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें।
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K L Saigal
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बॉलीवुड के सुपरस्टार्स की बात करें तो अमिताभ बच्चन, राजेश खन्ना, शाहरुख खान, सलमान खान का नाम जेहन में आता है लेकिन क्या आपको पता है कि केएल सहगल को हिन्दी सिनेमा का पहला सुपरस्टार माना जाता है। केएल सहगल को अपना आदर्श मानने वालों में किशोर कुमार और मुकेश जैसी शख्सियत हैं जिनसे प्रभावित होकर हिन्दी सिनेमा में गाने के लिए कदम रखा।
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केएल सहगल को बचपन से ही संगीत में रुचि थी। उनकी मां केसरबाई ने उन्हें सूफी पीर सलमान युसूफ से प्रारंभिक शिक्षा दिलवाई। साथ ही वो अपने पिता अमरचंद प्रताप सिंह के काम में हाथ बंटाते थे। बाद में वो टाइपराइटर सेल्समैन का काम करने लगे थे। सहगल के पिता जम्मू एंड कश्मीर की कोर्ट ऑफ राजा में काम करते थे। असल में उनकी मां का लगाव भी संगीत की ओर शुरू से था।
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सहगल ने कम उम्र में ही स्कूल छोड़ दिया था। 13 साल की उम्र में जब सहगल की आवाज में थोड़ा बदलाव आने लगा तो वह काफी डर गए। यहां तक कि वह महीनों नहीं बोले। जिससे परेशान होकर परिवारवालों ने संत को दिखाया, जिन्होंने सहगल को रियाज करने की सलाह दी। उनके दोस्त मेहरचंद जैन ने गाने में करियर बनाने के लिए उन्हें प्रोत्साहित किया था।
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संगीतकार रायचंद बोरल ने उनकी प्रतिभा को पहचाना और कई मौके दिए। रायचंद बोरल ने सहगल को फिल्म स्टूडियो न्यू थियेटर में कॉन्ट्रैक्ट भी दिलाया था। फिल्मों में गाने के लिए उन्हें हर महीने 200 रुपये मिलते थे। शुरुआती दौर में देव गांधार राग में 'झुलाना झुलाओं' गाना काफी हिट हुआ। इसके बाद उन्होंने गायकी के साथ-साथ एक्टिंग में भी हाथ आजमाया। सुबह के सितारे, जिंदा लाश और मोहब्बत के आंसू जैसी फिल्मों ने लोगों को काफी प्रभावित किया। उनके गाये गाने जब दिल ही टूट गया, तड़पत बीती दिन रैन, गमती ए मुस्तकिल जैसे गानों ने उन्हें ऊंचाईयों तक पहुंचा दिया।