फिल्ममेकर अनुराग बसु ने अपनी फिल्मों से मनोरंजन जगत में अपनी अलग जगह बनाई है। अनुराग ने अपने बेहतरीन डायरेक्शन से समय-समय पर खुद को साबित किया है। वहीं, अनुराग की जीवन की कहानी भी किसी बॉलीवुड मूवी से कम नहीं है। अच्छे के साथ-साथ डायरेक्टर ने बहुत बुरे दिन भी देखे हैं। आठ मई 1970 को भिलाई, छत्तीसगढ़ में जन्मे अनुराग आज अपना 53वां बर्थडे सेलिब्रेट कर रहे हैं। तो आइए, फिल्ममेकर से जुड़े कुछ दिलचस्प और अनकहे किस्से जान लेते हैं-
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अनुराग बसु
- फोटो : सोशल मीडिया
अनुराग बसु एक सफल डायरेक्टर होने के साथ ही एक लेखक भी हैं, उन्होंने छोटे पर्दे से अपने करियर की शुरुआत की फिर आगे चलकर साल 2002 में फीचर फिल्मों में अपनी धाक जमाई। अनुराग बसु को उनकी ‘मर्डर’, ‘लाइफ इन ए... मेट्रो’, 'गैंगस्टर', 'बर्फी' और 'काइट्स' जैसी सक्सेसफुल मूवी के लिए जाना जाता है। अनुराग बसु भारत के सबसे रईस डायरेक्टर्स में से एक हैं। उनका नेट वर्थ कुल 330 करोड़ रुपये है।
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वहीं, डायरेक्टर की लव लाइफ भी काफी दिलचस्प रही है। अनुराग की उनकी पत्नी तानी से पहली मुलाकात गुवाहाटी में हुई थी, जहां वह एक ड्रॉक्यूमेंट्री फिल्म पर काम कर रहे थे। उस वक्त तानी, अनुराग की बॉस हुआ करती थीं। यह लव स्टोरी फाइव स्टार के एक खाने की टेबल से शुरू हुई। एक डिनर के दौरान टेबल पर काफी खाना परोसा गया था। वहीं, एक बंगाली होने के नाते अनुराग को मछली खाना बेहद पसंद है। हालांकि, मछली देखने के बाद भी अनुराग इस असमंजस में थे कि उसे खाया कैसे जाए। हर कोई चाकू, छूरी से मछली खा रहा था इसी बीच अनुराग की नजर तानी पर पड़ी जो हाथ से उसका लुत्फ उठा रही थीं। फिर क्या था अनुराग, तानी की इस अदा पर पूरी तरह मर मिटे। दोनों के बीच रिश्ते की शुरुआत हुई और आखिरकार इन्होंने शादी कर ली। कपल की दो बेटियां ईशाना और अहाना हैं।
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अनुराग बसु को लेकर एक हैरान करने वाली बात यह है कि वह आज भी खुद को अपने पिता की मौत का जिम्मेदार मानते हैं। डायरेक्टर ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था, 'काइट्स को बनाने के दौरान, मैंने अपने पिता को खो दिया, जो मेरे लिए सब कुछ थे। मैं उनकी मौत के लिए खुद को दोषी मानता हूं। मैं एक टेलीविजन शो में एक मौत का सीन लिख रहा था और सोच रहा था कि अगर मेरे पिताजी की मौत हो गई तो कैसा होगा।'
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अनुराग बसु ने आगे बताया, 'उस रात मैं उनके कमरे में गया, उन्हें गले लगाया और वापस आ गया। मेरे उस सीन को लिखने के कुछ ही समय बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा और उनका निधन हो गया। मैं बिखर गया था और इसने मेरे जीवन में सब कुछ प्रभावित किया। मेरे पिता मुंबई में सफल होना चाहते थे। भले ही मेरे पिता ने मेरे जरिए बॉलीवुड का हिस्सा बनने का अपना सपना पूरा किया, लेकिन मुझे हमेशा दोषी महसूस हुआ कि मैं सफल हो गया जब वह नहीं रहे। वह मेरी प्रेरणा थे और मुझे उनकी बहुत याद आती है।'