हिंदी सिनेमा में गुटबाजी के मुद्दे पर बेहतरीन अभिनेता गोविंदा ने एक बार फिर से आवाज उठाई है। उन्होंने कहा है कि आज के समय में कुछ मुट्ठी भर लोग ही हैं जो इस पूरी फिल्म इंडस्ट्री को अपने वश में रखते हैं। वही फैसला करते हैं कि सिनेमाघरों में किसकी फिल्म को अच्छे से रिलीज किया जाना है और किसकी फिल्म को किनारे कर देना है।
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सलमान खान और गोविंदा
- फोटो : सोशल मीडिया
अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की कथित आत्महत्या के बाद हिंदी सिनेमा में लगातार वंशवाद और गुटबाजी जैसे मुद्दों पर चर्चाएं हो रही हैं। इसी चर्चा का हिस्सा बनते हुए गोविंदा ने अपने साथ हुए अनुभवों को साझा किया है। उन्होंने कहा है कि इस इंडस्ट्री में पक्षपात और गुटबाजी जैसी चीजें होती है। इस बात को नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने बताया है कि यहां पर अब सिर्फ कुछ लोगों की ही चलती है।
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गोविंदा
- फोटो : अमर उजाला
गोविंदा ने कहा, 'कुछ समय पहले यहां सिर्फ उन लोगों को काम मिलता था जो हुनरमंद होते थे। हर फिल्म को सिनेमाघरों में बराबरी का दर्जा दिया जाता था। लेकिन, आज के समय में कुछ चार-पांच लोग ही हैं जो इस पूरे व्यापार पर तानाशाही करते हैं।'
गोविंदा ने आगे कहा- 'वही फैसला करते हैं कि कौन सी फिल्म को अच्छे से सिनेमाघरों में रिलीज किया जाना है और कौन सी को नहीं। मेरी खुद कुछ अच्छी फिल्मों को सिनेमाघरों में ठीक से रिलीज नहीं होने दिया गया। लेकिन, अब चीजें बदल रही हैं।'
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गोविंदा बेटी के साथ
- फोटो : ट्विटर
फिल्म इंडस्ट्री में वंशवाद के मुद्दे पर भी गोविंदा ने अपनी बेटी टीना आहूजा को लेकर बात रखी। उन्होंने कहा, 'मैंने उसके लिए कभी कोई बात नहीं की। अगर मैंने ऐसा किया होता तो शायद उसके लिए चीजें कुछ अलग हो सकती थीं। वह अपना रास्ता खुद बनाने में विश्वास रखती है। लेकिन, वह सफलता तभी हासिल कर पाएगी जब उसका समय आएगा।'
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