हिंदी सिनेमा में तकरीबन छह दशक तक दर्शकों पर अपनी अदाकारी का जादू बिखेरने वाले देव आनंद हमेशा याद आएंगे। 3 दिसंबर 2011 को उन्होंने अंतिम सांस ली तो ऐसा लगा मानो किसी युग का अंत हो गया हो। वो गर्दन हिलाकर उनका डायलॉग बोलना, काला कोट पहनकर लोगों को अपना दीवाना बना लेना जैसी तमाम बातें लोगों को सदियों तक याद रहेंगी। हिंदी सिनेमा में देव साहब का योगदान कभी नहीं भुलाया जा सकता है। आज उनकी पुण्यतिथि आपको बताते हैं उनसे जुड़ी कुछ खास बातें....
अपनी फिल्मों के दौर में लड़कियां देव आनंद पर मरती थी। उन्हें देखकर वो छत से कूद जाने को तैयार रहती थीं। लेकिन करोड़ो दिलों पर राज करने वाले देव आनंद का दिल तो मशहूर अभिनेत्री सुरैया पर आ गया था। देव साहब और सुरैया का प्यार फिल्म विद्या की शूटिंग के दौरान एक हादसे के दौरान सुरैया की जान बचाने से शुरू हुआ था। उस समय सुरैया एक बड़ी अभिनेत्री थीं और देव आनंद अपने करियर की शुरुआत कर रहे थे। लेकिन इसके बावजूद दोनों एक दूसरे के प्यार में डूबने लगे थे।
अपनी आत्मकथा 'रोमांसिग विद लाइफ' में देव आनंद ने बताया था कि, 'काम के दौरान सुरैया से मेरी दोस्ती गहरी होती जा रही थी। धीरे-धीरे ये दोस्ती प्यार में तब्दील हो गई। एक दिन भी ऐसा नहीं बीतता था जब हम एक दूसरे से बात ना करें। अगर आमने-सामने बात नहीं हो पा रही हो तब हम फोन पर घंटों बात करते रहते थे। जल्द ही मुझे समझ आ गया कि मुझे सुरैया से प्यार हो गया है।'
'लेकिन सुरैया की नानी इस प्रेम कहानी में सबसे बड़ी अड़चन थीं। सुरैया के घर में नानी की इजाजत के बगैर कुछ भी नहीं होता था। हमारी प्रेम कहानी की वो विलेन थीं। इसकी सबसे बड़ी वजह थी कि सुरैया मुस्लिम थीं जबकि मैं हिंदू।'
देव आनंद कहा था कि 'सुरैया के लिए मैंने सगाई की अंगूठी खरीदी। मैं अंगूठी लेकर सुरैया के पास पहुंचा लेकिन उन्हें पता नहीं क्या हुआ उन्होंने मेरी दी हुई अंगूठी समुद्र में फेंक दी। मैंने कभी नहीं पूछा कि आखिर उन्होंने ऐसा क्यों किया। मैं वहां से चला आया। इस तरह से देव आनंद और सुरैया के प्रेम में मजहब दीवार बनकर आड़े आ गया और दोंनो ने फिर कभी एक दूसरे से मुलाकात नहीं की।