बॉलीवुड की दुनिया में मशहूर इम्तियाज अली ने जहां अपनी निजी जिंदगी के बारे में खुलकर बात की, वहीं वे बॉलीवुड में नेपोटिज्म पर बेबाकी से बोले, पढ़ें इंटरव्यू।
लैला-मजनूं की प्रमोशन के सिलसिले में इम्तियाज अली सोमवार को चंडीगढ़ स्थित होटल जेडब्ल्यू मेरियट पहुंचे। यहां उन्होंने कहा कि नेपोटिज्म का कॉन्सेप्ट मुझे समझ में नहीं आया। मैं अपने भाई की फिल्म को प्रोड्यूस कर रहा हूं, इसमें मुझे कुछ गलत नहीं लगता। मैं उसे मौका नहीं दूंगा, तो कौन देगा। मेरा अनुभव उसे एक नई दिशा देगा, जो उसके करियर के लिए गलत नहीं होगा। फिल्में सदा के लिए हैं, पैसा जरूरी नहीं..
इम्तियाज ने कहा कि मैं लैला-मजनूं दिखाना चाहता था न कि एक्टर। इसी वजह से नई स्टार कास्ट का सिलेक्शन किया। जब वह रॉक स्टार लिख रहे थे तो उसी समय लैला-मजनूं भी पढ़ी। उन्होंने उसकी गहराई को खंगाला और तभी से यह बात दिमाग में थी। दो वर्ष पहले उन्होंने स्क्रिप्ट लिखी। उन्होंने कहा कि जब सारी कहानी तैयार हो गई तो उनको लगा कि एक नए डायरेक्टर को होना चाहिए। इसीलिए साजिद को डायरेक्शन का काम दिया।
इम्तियाज ने कहा कि नया डायरेक्टर लेने की वजह यह थी कि वह अपने एंगल से सोच सकता था और उसमें नया इनोवेशन भी हो सकता था। ऐसा हुआ भी है और फिल्म में वह दिखाई देगा। इम्तियाज अली ने कहा कि बाक्स आफिस के नजरिए से देखें तो उसका फंडा एकदम अलग है। अब कोई भी व्यक्ति बाक्स आफिस को केंद्रित रखकर मूवी नहीं बनाता है। उन्होंने कहा कि उनकी कोशिश होती है कि जो भी व्यक्ति मूवी में पैसा लगाए, वह वापस आए। ऐसा बाक्स ऑफिस के भरोसे नहीं होता है।
इम्तियाज अली ने कहा कि उनकी फिल्म लैला मजनूं में ऐसा कुछ भी नहीं है, जो कि एक लव स्टोरी में होना चाहिए। इसमें लीड रोल में अविनाश तिवारी और तृप्ति डिमरी हैं। उन्होंने कहा कि वास्तव में प्यार के लिए हद से गुजर जाने की दास्तां है ‘लैला मजनूं’। फिल्म में सिर्फ वह चीजें हैं, जो हम सच में महसूस करते हैं। यह ऐसी फिल्म है, जो दर्शकों की एक खास क्लास के लिए है, जिन्हें रियलिटी को स्क्रीन पर देखना पंसद है। कश्मीर में ही दोनों का प्यार पनपता है, लेकिन वहां की समस्याओं का खामियाजा इनकी प्रेमकहानी को भुगतना पड़ता है।