अमर उजाला द्वारा शुरू की गई 'बॉलीवुड गॉसिप्स' सीरीज में आज हम आपको उस किस्से के बारे में बताने जा रहे हैं, जब राजनीति में जीत हासिल करने और दूसरी पार्टी को हराने के लिए फिल्मी दांव खेला गया था। जब लोगों को चुनावी रैली से दूर रखने के उद्देश्य से फिल्मों का सहारा लिया गया था।
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बाबू जगजीवन राम (फाइल फोटो)
दरअसल, यह किस्सा पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के समय का है। तब किन्ही कारणों से जगजीवन राम ने कांग्रेस से इस्तीफा दिया था। विपक्ष ने इसका फायदा उठाया और दिल्ली के रामलीला मैदान में रैली का आयोजन करने का एलान कर दिया। हालांकि, जनता विपक्ष की बातों से प्रभावित न हो जाए, यह सोचकर इंदिरा गांधी की सरकार ने इस रैली से लोगों को दूर करने की एक तरकीब निकाली।
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मोरारजी देसाई (बाएं) और तत्कालीन कांग्रेस अध्यक्ष एस निजलिंगप्पा के साथ इंदिरा गांधी।
- फोटो : सोशल मीडिया
उस जमाने में सिर्फ को ही रविवार को ही दूरदर्शन पार शाम चार बजे फीचर फिल्म का प्रसारण हुआ करता था। यही कारण था कि लोग बेसब्री से फिल्म का इंतजार किया करते थे। इंदिरा गांधी ने लोगों की इसी उत्सुकता का फायदा उठाया। दरअसल, रैली भी रविवार को ही आयोजित की गई थी और दूरदर्शन पर पहले से ही बताया जा रहा था कि आने वाले रविवार को शाम चार बजे 'वक्त' फिल्म दिखाई जाएगी। लेकिन, अचानक सूचना- प्रसारण मंत्री विद्याचरण शुक्ल ने 'वक्त' की जगह उस समय की बेहद लुभावनी फिल्म 'बॉबी' के प्रसारण का निर्देश दे दिया। इतना ही नहीं, लोगों को घरों में कैद रखने के लिए प्रसारण का वक्त भी चार बजे से बढ़ाकर पांच बजे करवा दिया गया।
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पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी
इंदिरा सरकार को उम्मीद थी कि उनके इस पैत्रे की वजह से विपक्ष की रैली नाकामयाब हो जाएगी। लेकिन 'बॉबी' का प्रसारण भी जनता को जगजीवन की रैली से दूर नहीं कर सकी। इसलिए, इंदिरा ने रामलीला मैदान के आसपास बसों की आवाजाही रोक दी। लेकिन, जगजीवन राम को लेकर जनता के अंदर इतना जोश था कि वह एक किलोमीटर पैदल तक चलकर मैदान पहुंचे।