बॉलीवुड एक्टर बलराज साहनी किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं। एक्टर ने अपने दमदार अभिनय से दर्शकों के दिल में खास जगह बनाई है।अपने बेहतरीन अदाकारी के जरिए उन्होंने आम आदमी की कहानी को पर्दे पर दर्शाया है। अभिनेता को न सिर्फ उनकी फिल्मों, बल्कि सामाजिक सरोकारों के लिए भी याद किया जाता है। बलराज का जन्म एक मई सन् 1913 में हुआ था। उनका असली नाम युधिष्ठिर था।
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बलराज साहनी
- फोटो : Social media
बलराज साहनी ही इकलौते ऐसे अभिनेता थे, जिन्होंने महात्मा गांधी से मुलाकात की थी। एक्टिंग की दुनिया में कदम रखने से पहले उन्होंने महात्मा गांधी के साथ सेवग्राम आश्रम में काम किया था। इससे पहले वो रविंद्रनाथ टैगोर के शांतिनिकेतन में अपनी पत्नी के साथ अध्यापक के तौर पर थे। एक्टर छह साल बाद भारत वापस लौट आए और यहीं से मार्क्सवाद की शुरुआती तालीम हासिल की।
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भारत आने के बाद एक्टर कम्युनिस्ट पार्टी और इंडियन प्रोग्रेसिव थियेटर एसोसियेशन' (इप्टा) में शामिल हो गए। एक्टर इसके जरिए लोगों की मदद करना चाहते थे। हालांकि, इप्टा से जुड़े रहने की वजह से उन्हें कई कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। यहां तक की बलराज को जेल भी जाना पड़ा।
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बलराज साहनी
- फोटो : सोशल मीडिया
बलराज फिल्मों में अपने किरदारों की वजह से दर्शकों के दिलों पर राज करते थे। एक्टर ने अपने करियर की शुरुआत फिल्म ‘हलचल’ से की थी। के. आसिफ की इस फिल्म में उन्होंने जेलर का किरदार निभाना था। इस बीच एक दिन खबर आई की रेल से कम्युनिस्ट पार्टी का जुलूस निकलने वाला है। ऐसे में बलराज साहनी अपनी पत्नी के साथ जुलूस में शामिल हो गए, लेकिन इस बीच हिंसा शुरु हो गई और पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। एक्टर तीन महीने तक जेल में रहे। ऐसे में वो फिल्म की शूटिंग करने के लिए जेल से आया करते थे।
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बलराज साहनी
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राजधानी दिल्ली के जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में साल 1976 में पहला दीक्षांत समारोह हुआ था। उस दौरान एक्टर के भाषण ने सबको हिला कर रख दिया था। उन्होंने अपने भाषण में कहा था कि अभी हमारी हालात उस पक्षी की तरह है, जो लंबे समय से बाद पिंजरे से तो आजाद हो गया, लेकिन यह नहीं जानता कि इसका करना क्या है। पंख होने के बाद भी वह उसी सीमा तक रहना चाहता है, जो उसके लिए निर्धारित की गई है।