अभिनेत्री राधिका आप्टे के अभिनय का डंका अब देश में ही नहीं, बल्कि विदेशों में भी बजने लगा है। अपने करियर में उन्होंने कुछ किरदार ऐसे निभाए हैं जिसकी वजह से उन्हें विदेशी फिल्मों में भी काम करने का मौका मिला। पिछले साल रिलीज हुई अंग्रेजी भाषा की फिल्म 'ए कॉल टू स्पाई' में राधिका ने नूर इनायत खान का किरदार निभाया है। इस ऐतिहासिक ड्रामा फिल्म की निर्माता सैरा मेगन थॉमस ने एक इंटरव्यू में बताया है कि इस किरदार को निभाने के लिए राधिका उनकी पहली पसंद थीं।
ऐसे मिला राधिका आप्टे को हॉलीवुड फिल्म का ये चर्चित रोल, फिल्म निर्माता ने सुनाई पूरी कहानी
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अपनी फिल्म में राधिका को लेने की प्रक्रिया समझाते हुए सैरा ने कहा कि उन्होंने राधिका को हिंदी भाषा की फिल्म 'पार्चड' में देखा था। इस फिल्म में सैरा को राधिका का किरदार बहुत पसंद आया और उन्होंने अपनी फिल्म में नूर इनायत खान के किरदार के लिए राधिका को लेने की बात फिल्म की निर्देशक लिडिया डीन पिल्चर से की। लिडिया को भी सैरा की बात पसंद आई और उन्होंने कहा कि उन्हें बड़ी खुशी होगी कि अगर राधिका इस फिल्म में काम करें और नूर का किरदार निभाएं। वही इस किरदार को खूबसूरती से अदा कर सकती हैं।
राधिका इस किरदार के लिए सैरा की पहली पसंद थीं। उन्होंने जब लिडिया से इस बारे में बात की तो वह भी इसके लिए सहमत हुईं। तब इस बारे में राधिका से बात की गई और राधिका ने भी तुरंत हां कह दी। सैरा को लग रहा था कि अगर नूर इनायत खान का महत्वपूर्ण किरदार अगर कोई शानदार भारतीय अभिनेत्री ही निभाए तो इस किरदार में और भी ज्यादा वजन बढ़ जाएगा। राधिका की यह पहली अमेरिकी फिल्म है।
सैरा का मानना है कि इसके साथ ही राधिका न सिर्फ भारत में, बल्कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़ी अभिनेत्री बन जाएंगी। राधिका आप्टे की यह फिल्म पिछले साल 21 जून को एडिनबर्ग इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में प्रदर्शित हो चुकी है।
फिल्म में राधिका ने जिस नूर इनायत खान का किरदार निभाया है, दरअसल वह द्वितीय विश्वयुद्ध के दौरान ब्रिटिश सरकार की तरफ से एक जासूस का काम करती थीं। उन्हें इस दौरान एक खास मिशन का कार्यपालक घोषित किया गया था। नूर इनायत खान पहली महिला वायरलेस ऑपरेटर थीं जिसे यूनाइटेड किंगडम से फ्रांस भेजा गया। नूर का उद्देश्य फ्रांसीसी लोगों को द्वितीय विश्वयुद्ध में सीजफायर के लिए तैयार करना था।
पढ़ें: फिल्म निर्माता कंचन अधिकारी की मां का निधन, 86 वर्ष की उम्र में ली आखिरी सांस