कोरोना के बढ़ते असर ने देश को केंद्रीय और विभिन्न राज्य सरकारों को कई तरह के नियम बनाने के लिए मजबूर कर रखा है। कई स्तरों पर लॉकडाउन की स्थितियां बनी ही हुई है। बहुत सी कंपनियों तो अब तक अपने कर्मचारियों से वर्क फ्रॉम होम ही करवा रही हैं। अब तो करीब करीब सभी कंपनियों के लिए वर्क फ्रॉम होम कराने की स्थितियां हैं।
करिअर गाइडेंस : 12वीं के बाद विदेशी भाषा कोर्सेज भी हैं बेहतर विकल्प, रोजगार भी अपार
कोविड-19 के चुनौती भरे माहौल में विदेशी भाषाओं के जानकारों के लिए जॉब के बेहतर अवसर सामने आकर खड़े हो गए हैं। खास तौर पर उन लोगों के लिए करिअर की नई उड़ान भरने का मौका है, जो एक से अधिक भारतीय भाषाओं के साथ ही विदेशी भाषाओं के अच्छे जानकार है।
पर्यटन, टूर एंड ट्रेवल्स के क्षेत्र में अभी भले ही ज्यादा मौके नहीं हैं लेकिन मेडिकल टूरिज्म के तहत खाड़ी के देशों के निवासी हर साल यहां निजी अस्पतालों में अपना इलाज कराने आ रहे हैं। इन्हें उचित तरीके से मार्गदर्शन के लिए विदेशी भाषा के विशेषज्ञ की जरूरत पड़ती है।
अब इससे भी बड़ी बात यह है कि विभिन्न देशों के अपने क्लाइंट्स को अपने साथ जोड़े रखने की चुनौती इन बड़ी-बड़ी कंपनियों के साथ खड़ी हो गई है। इसके लिए उन्हें विदेशी भाषाओं के जानकारों का सहारा लेना पड़ रहा है। वैश्वीकरण के दौर में अनुवाद और पत्र- पत्रिकाओं का संपादन भी ऐसे लोगों के लिए निजी व्यवसाय के रूप में काम करने का मौका दे रहा है। विदेशी भाषाओं के जानकार विदेशी मीडिया में भारत से ही रिपोर्टिंग का काम संभाल रहे हैं।
इधर, मेक इन इंडिया ने इस प्रक्रिया को और बढ़ा दिया है। विदेशी कंपनियां भारत में अपने बेस ऑफिस स्थापित कर रही हैं ऐसी बहुत कंपनियां हैं, जो अंग्रेजी की अपेक्षा अपनी भाषा में ही कार्य करने की प्राथमिकता देती हैं। उन कंपनियों के अधिकारियों की भारतीय समकक्षों के साथ बात करने में भाषाई दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में उस देश की भाषा और भारतीय भाषाओं के जानकार ही संप्रेषण को इस खाई को पाटते हैं।
लिहाजा ऐसे जानकारों के लिए जॉब की संभावनाएं तेजी से बढ़ रही है। पहले जहां आमने-सामने बात होती थी, कहीं अब विभिन्न एप्लीकेशंस के जरिये सामूहिक संपर्क साधा जा रहा है। इसके लिए विदेशी भाषाओं के साथ ही तकनीकी विशेषज्ञता होना भी जरूरी हो गया है।
इस क्षेत्र में रोजगार की कोई कमी नहीं है। विदेशी भाषाओं में कोर्स करने के बाद हेल्थकेयर, शिक्षा, टूरिज्म, बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, दूतावासों एवं देश के विभिन्न संस्थानों में रोगगार के अवसर प्राप्त होते हैं। पर्यटन, होटल, इंटरनेशनल मीडिया हाउस में न्यूज ट्रांसलेटर व बतौर रिपोर्टर भी कार्य कर सकते हैं। लेकिन इससे भी अलग है कि अब ऑनलाइन यानी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये होने वाली बैठकों में भी विदेशी भाषाओं के जानकारों की तेजी से बढ़ रही है। - संजीव रावत, लैंग्वेज एक्सपर्ट
रोजगार की कोई कमी नहीं : रावत
आवश्यक कौशल
विदेशी भाषा पर कमांड और बेहतर कम्युनिकेशन स्किल इस क्षेत्र में कामयाबी के कई रास्ते दिखाती है। अगर अनुवादक बनना चाहते हैं तो विदेशी भाषा के साथ-साथ अंग्रेजी या हिन्दी पर भी पकड़ होनी चाहिए। साथ ही उसका व्याकरण संरचना और उससे जुड़ी संस्कृति व इतिहास की भी जानकारी होनी चाहिए।
शैक्षणिक योग्यता
आप स्कूली शिक्षा के दौरान कोई एक देशी या विदेशी भाषा एक विषय के रूप में पढ़ सकते हैं। 12वीं के बाद आप डिग्री डिप्लोमा या सर्टिफिकेट कोर्स कर सकते है जो कि 6, 9, 12, 18 माह या अधिक के भी हो सकते हैं। आप विभिन्न विश्वविद्यालयों से पार्ट टाइम या फुल टाइम सर्टिफिकेट कोर्स भी कर सकते हैं।
सीखने के लिए प्रमुख संस्थान
- संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास करने के बाद आप भारतीय विदेश सेवा विभाग में सेवाएं दे सकते हैं।
- आप विभिन्न देशों की मल्टीनेशनल कंपनियों में लैंग्वेज ऑफिसर के पदों पर आवेदन कर सकते हैं।
- इस कोर्स को अच्छे से करने के बाद आप खुद इसे पढ़ा कर अच्छे पैसे कमा सकते हैं। कई संस्थान फॉरेन लैंग्वेज टीचर भी रखते हैं।
- देश एवं विदेश में पर्यटन भी एक बड़ा व्यवसाय क्षेत्र बन चुका है। एकाधिक भाषाओं के जानकार यहां अच्छा पैसा कमा सकते है।
- पर्यटकों की मदद के लिए आप टूरिस्ट गाइड की भूमिका भी निभा सकते हैं। इस दौरान आप उनके साथ-साथ घूमने का आनंद भी ले सकते हैं।
- ट्रांसलेटर यानी अनुवादक के रूप में भी करिअर शुरू किया जा सकता है।
- उच्च शिक्षा के लिए विदेशी विश्वविद्यालयों में अप्लाई कर सकते हैं। कई देश उनकी भाषा सीखने वाले छात्रों को शिक्षा में कई तरह की सहूलियत देते हैं।
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