जमा देने वाली ठंड, अगल-बगल होते धमाके, बॉर्डर पार करने में 45 किमी का पैदल सफर। जब मंजिल दिखी भी, तो यूक्रेन पुलिस ने बंदूक की नोक पर ले लिया। एक बार लगा कि रूस के धमाकों से तो वह बच गई, लेकिन अब जान से हाथ धोना पड़ेगा। काफी देर तक मान-मनौव्वल के बाद पुलिसकर्मी शांत हो सका। यूक्रेन से वाया पोलैंड आईजीआई एयरपोर्ट पर पहुंची चाहत ने अपनी खौफनाक दस्तां बयां की। बोलते वक्त हकीकतन वह रो रही थी। मां का दुलार भी काम नहीं कर रहा था। बगल में खड़ी सना के चेहरे पर युद्ध का खौफ साफ दिख रहा था। आखें फटी हुई थीं। हलक हुआ था। जुबान से शब्द नहीं निकल रहा था।
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यूक्रेन से दिल्ली लौटी बेटी को चूमते पिता
- फोटो : अमर उजाला
काफी देर बात करने के बाद वह थोड़ा सामान्य हो सकी। रूक-रूक कर उसने बताया कि वह फरीदाबाद की रहने वाली है। जब लवीव नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी को छोड़ा तो उनके पास पीने का पानी तक नहीं था। किसी की कोई मदद भी नहीं मिली। भारतीय अधिकारी बॉर्डर क्रॉस करने पर पोलैंड में मिले। बॉर्डर पर -8 डिग्री सेल्सियस का तापमान था। वहां दो दिन तक रूकना पड़ा। वजह यह कि पुलिस यूक्रनियन नागरिकों को पहले बॉर्डर पार करवा रही थी। जब यूक्रेनियन नहीं होते थे तो भारतीयों का नंबर आता। ठंड से बचने हम लोगों को आग जलाने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने बुझा दिया। दो-दिन और रातें कितनी खौफनाक थीं, उसको बयां नहीं जा सकता।
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एयरपोर्ट से बाहर आते भारतीय छात्र
- फोटो : अमर उजाला
उधर, करीब आधे घंटे बाद भारत पहुंच जाने का जब चाहत को यकीन हो गया तो उसने बताया कि ठंड की वजह से साथ चल रहे नाइजीरियन छात्र की मौत हो गई। इसके पैर भी जम से गए थे। साथ चल रहे कई दोस्तों के नाक से खून तक आने लगा था। इस सबसे गहरे तक डर बैठ गया था। हर पल मौत बगल में खड़ी दिख रही थी। फिर भी, चलना बंद नहीं किया। और काम भी यही चलना आया और आज भारत पहुंच सकी हूं।
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बेटी को देख पिता की आंखों में आए आंसू
- फोटो : अमर उजाला
400 मीटर दूरी फटा बम, छाया घुप अंधेरा, परिवार से मिलने आई जान
आगरा की कशिश पचौरी इवानो नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी की फर्स्ट ईयर की छात्रा है। शनिवार वह हॉस्टल के बगल स्थित शॉपिंग मॉल से दूध का पैकेट लेने गई थी। वह बाहर निकल ही रही थी, तभी महज 400 मीटर दूर बम धमाका हुआ। तेज आवाज के साथ हर तरफ अंधेरा छा गया। हर तरफ चीख-पुकार मची थी। धुंआ हल्का होने पर उसका कंसल्टेंट मसूर दिखा। उसने किसी तरह कशिश को मौके से निकाला और हॉस्टल से सामान के साथ हंगरी बॉर्डर पर पहुंचाया। बॉर्डर पार करने की भी अपनी चुनौती थी।
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यूक्रेन से लौटा भारतीय छात्र
- फोटो : अमर उजाला
कशिश के प्रदीप कुमार मंगलवार एयरपोर्ट पर मौजूद थे। पहली दो फ्लाइट ने कशिश आईजीआई एयरपोर्ट तक पहुंची थी। बात करने पर वह रो पड़े। सुबकते हुए उन्होंने बताया कि कशिश से बात तो हो रही थी, लेकिन उसने बम धमाके और उसमें फंसे होने की खबर हमें नहीं दी। उसकी दोस्त से जब सूचना मिली, तब से जान अटकी पड़ी हुई है। यहां भी आठ बजे की फ्लाइट से आना था, लेकिन 10:30 बजे तक नहीं आ सकी है। यहां कुछ पता भी नहीं चल पा रहा है। 11:30 बजे की फ्लाइट से जब कशिश की मुलाकात हुई तो परिवार से लिपटकर वह काफी देर तक रोती रही। आंसू परिवार से दुबारा मुलाकात हो जाने थे, जिसकी उसने यूक्रेन में आस छोड़ दी थी। तभी एयरपोर्ट पर अपने पिता के बाद जो पहली बात उसने बोली वह यह कि सोशल मीडिया का सहारा लेकर प्रधानमंत्री से अपील करें कि प्रधानमंत्री युद्ध रूकवा दें।