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एससी/एसटी एक्ट केस: अजीत भारती पहुंचे दिल्ली हाईकोर्ट, ट्रायल कोर्ट ने खारिज की थी अग्रिम जमानत याचिका
Wed, 09 Sep 2026 08:44 PM IST
अनुज कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: अनुज कुमार
Updated Wed, 09 Sep 2026 08:44 PM IST
सार
यूट्यूबर अजीत भारती ने अग्रिम जमानत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के सात सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया गया था।
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अजीत भारती
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
यूट्यूबर अजीत भारती ने अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के मामले में अग्रिम जमानत के लिए दिल्ली हाईकोर्ट का रुख किया है। उन्होंने ट्रायल कोर्ट के 7 सितंबर के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उन्हें राहत देने से इनकार कर दिया गया था।
मामला अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हो सकता है। इस मामले में 23 अगस्त को दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में उन पर एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के दिल्ली राज्य अध्यक्ष बालकराम बौद्ध ने दायर की थी।
ट्रायल कोर्ट ने माना भारती की भाषा अपमानजनक
7 सितंबर को अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि भारती द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा में जातिगत पदानुक्रम, जाति आधारित शुद्धता की धारणाएं और विवाह तथा वंश के मामलों में ऊपरी जाति की निचली जाति पर कथित श्रेष्ठता का भाव झलकता है।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने कहा था कि चंद्रशेखर आजाद को ऊपरी जाति की लड़की से शादी करने लायक बनने की उनकी टिप्पणी जाति का विशिष्ट संदर्भ है और अपमानजनक है।
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मामला अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध हो सकता है। इस मामले में 23 अगस्त को दिल्ली के नॉर्थ एवेन्यू पुलिस स्टेशन में उन पर एफआईआर दर्ज की गई थी। शिकायत आजाद समाज पार्टी (कांशी राम) के दिल्ली राज्य अध्यक्ष बालकराम बौद्ध ने दायर की थी।
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ट्रायल कोर्ट ने माना भारती की भाषा अपमानजनक
7 सितंबर को अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि भारती द्वारा इस्तेमाल की गई भाषा में जातिगत पदानुक्रम, जाति आधारित शुद्धता की धारणाएं और विवाह तथा वंश के मामलों में ऊपरी जाति की निचली जाति पर कथित श्रेष्ठता का भाव झलकता है।
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अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सौरभ प्रताप सिंह लालेर ने कहा था कि चंद्रशेखर आजाद को ऊपरी जाति की लड़की से शादी करने लायक बनने की उनकी टिप्पणी जाति का विशिष्ट संदर्भ है और अपमानजनक है।