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होली के दिन यहां महिलाएं डालती हैं पुरुषों पर रंग और बरसाती हैं कोड़े

Sat, 19 Mar 2016 04:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव
ब्यूरो/अमर उजाला, गुड़गांव Updated Sat, 19 Mar 2016 04:17 PM IST
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women play holi with colours and beat men with swinge
होली पर कोड़े बरसाती महिलाएं

मानेसर। जिले में ब्रज, मराठी, बिहारी और राजस्थानी होली के साथ-साथ हरियाणवीं होली भी मशहूर है। शहर और आसपास के गांवों को देखा जाए तो सबसे बड़ी संख्या स्थानीय लोगों की है और उन्होंने शहरी कल्चर में आने के बावजूद अपनी परंपरा नहीं छोड़ी है। इसी का एक हिस्सा है कोड़ेमार होली। होली के एक दिन पहले यहां गांवों और मोहल्लों में पहले महिलाएं पुरुषों पर रंग डालेंगी और उसके बाद कोड़े बरसाएंगी। बाद में उन्हें पकवान खिलाएंगी। इसकी तैयारियां चल रही हैं। 

women play holi with colours and beat men with swinge
होली पर कोड़े बरसाती महिलाएं

महिलाएं कपड़े के कोड़े तैयार कर रही हैं। हरियाणा में यह काफी पुरानी रिवाज है। गांवों में होली को लेकर चौपाई और सांग शुरू हो गए हैं। सांग में गांव के किसी एक परिवार को लेकर उसकी नकल कर हसीं-मजाक का माहौल बनाया जा रहा है। यह कोशिश पुराने गिले-शिकवों को दूर करने की भी है। वहीं युवा होलिका दहन के लिए लकड़ियां और उपले एकत्र कर सबसे ऊंची होलिका बनाने की कोशिश में जुटे हुए हैं। कई क्षेत्रों में ब्रज की तरह लठ मार तो कई स्थानों में कोड़े बरसाने वाली होली का आनंद पकवानों के साथ बढ़ जाता है। इस मौके पर गुलगुले और गुजिया विशेष तौर पर तैयार होंगे।

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होली

दिनेश रामपुरा: कोड़ेमार होली में काफी आनंद आता है। गिले-शिकवे भी दूर होते हैं। मुझे लगता है कि ऐसी होली सिर्फ इसी क्षेत्र में होती है। कोड़े से चोट लगने पर भी इस दिन लोग कोई शिकायत नहीं करते।

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होली

राकेश भांगरौला: कोड़ेमार होली खेलने के बाद शाम को कई जगहों पर लोग मेलों में जाते हैं। जिले के सिधरावली व कालीखोली में मेला लगता है।

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होली

राष्ट्र यादव: होली दहन के समय नए अनाज की शुरुआत करने के लिए जौ की बालियां होलिका में भून कर घर में रखी जाती हैं। कोड़े की मार कई दिन तक होली की याद दिलाती रहती है। 

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