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क्या हुआ जब योगी के विरोध में खड़ी हो गई थी उनकी ही हिंदू युवा वाहिनी सेना
Mon, 24 Apr 2017 10:00 AM IST
टीम डिजिटल/अमर उजाला, नोएडा
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Updated Mon, 24 Apr 2017 10:00 AM IST
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राजनीति में आने के बाद योगी आदित्यनाथ ने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए एक संगठन का निर्माण किया था। वैसे तो यह संगठन गैर-राजनीतिक था लेकिन बनने के बाद से ही इसी राजनीति पैठ बढ़ाने की इच्छा शक्ति प्रबल होती गई। हिंदुत्व का झंडा ऊंचा करने के लिए योगी आदित्यनाथ ने जिस संगठन को बनाया था वो एक समय उनके सामने ही खड़ा हो गया था और परेशानी का सबब बन गई थी।
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hindu yuva vahini
हम बात कर रहे हैं योगी आदित्यनाथ द्वारा 2002 में निर्मित संगठन हिंदु युवा वाहिनी की। सांस्कृति और सामाजिक गतिविधियों को आगे बढ़ाने के लिए जिस संगठन का निर्माण हुआ था उसने धीरे-धीरे अपनी पहचान एक उग्र हिंदुवादी संगठन के रूप में बना ली जिसका नेतृत्व योगी आदित्यनाथ कर रहे थे। यही संगठन एक समय में योगी के सामने आकर उनके विरोध में खड़ा हो गया था।
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योगी आदित्यनाथ
देखते ही देखते हिंदू युवा वाहिनी की पहचान योगी के सेना के रूप में होने लगी। शुरुआत में तो इस संगठन पर पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई जिलों में दूसरे समुदाय पर हमले और सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के भी दर्जनों मामले दर्ज हुए।
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बीजेपी सांसद योगी आदित्यनाथ रोहतक में एक कार्यक्रम के दौरान
- फोटो : अमर उजाला
इन दर्जनों मामलों की वजह से हिंदुत्व की वकालत करने वाले लोग तेजी से हिंदू युवा वाहिनी से जुड़ते गए और यह पूर्वांचल में एक बड़ा संगठन बनकर उभरने लगा।
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योगी आदित्यनाथ
यही नहीं इनके समर्थक तो ये भी नारे लगाने लगे कि गोरखपुर में रहना है तो योगी योगी कहना है। 2007 में हिंदू युवा वाहिनी ने राजनीतिक राह पकड़नी शुरु की। गोरखपुर में 2007 में हुए सांप्रदायिक दंगे के बाद वोट बैंक को रिझाने के लिए सांप्रदायिक कार्ड सबसे उपयुक्त था।
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