फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें

बच्चों के कमरे को उसी तरह सहेजा है जैसा वो छोड़कर गए थे

Thu, 20 Aug 2015 01:35 AM IST
Updated Thu, 20 Aug 2015 01:35 AM IST
विज्ञापन

बच्चों के कमरे को उसी तरह सहेजा है जैसा वो छोड़कर गए थे

uphar Incident: when bell ring we think children have come

दरवाजे पर दस्तक होते ही लगता है बेटा-बेटी आ गए। दरवाजा खेलते ही किसी अन्य को खड़े देखकर मन भर आता है। उपहार हादसे में 18 वर्ष पहले स्कूल जाने वाले अपने बेटे-बेटी को खोने वाली नीलम ने यह दर्द बयां किया। उन्होंने बताया कि आज भी दोनों बच्चों के कमरे को उसी तरह से सहेज रखा है जैसे वे बार्डर फिल्म देखने के लिए जाते समय छोड़ गए थे। नीलम ने कहा उन्हें बार-बार लगता है कि बच्चे यह न कहें मम्मी कमरा क्यों छेड़ा। (सभी फोटो: अनिल कुमार/अमर उजाला, नई दिल्ली)


बच्चों के कमरे को उसी तरह सहेजा है जैसा वो छोड़कर गए थे

uphar Incident: when bell ring we think children have come

नीलम कृष्ण मूर्ति उन अभागों में शामिल हैं जिन्होंने उपहार अग्निकांड हादसे में अपने दोनों बच्चों को गवां दिया। नीलम उन पलों को याद कर कहती हैं कि उनकी बेटी उन्नति (18) ने 12वीं कक्षा अच्छे नंबरों से पास की थी। वह कॉलेज में दाखिले के सपने संजो रही थी। वहीं, बेटा उज्जवल (13) नौवीं कक्षा में पढ़ता था।

बच्चों के कमरे को उसी तरह सहेजा है जैसा वो छोड़कर गए थे

uphar Incident: when bell ring we think children have come

नीलम ने बताया दोनों बच्चों ने कहा मम्मी सनी देओल की बॉर्डर फिल्म देखनी है और हमने भी बच्चों को प्यार से फिल्म देखने भेज दिया। हमें क्या पता था कि घर से गए बच्चे कभी वापस नहीं आएंगे। आग की सूचना मिली तो उपहार सिनेमा हॉल की तरफ भागे, लेकिन सब कुछ खाक हो चुका था।

विज्ञापन
विज्ञापन

बच्चों के कमरे को उसी तरह सहेजा है जैसा वो छोड़कर गए थे

uphar Incident: when bell ring we think children have come

आज भी जब दरवाजे पर घंटी बजती है तो लगता है बच्चे आ गए। फोन की घंटी बजती है तो लगता है कि बच्चे आने की सूचना देने वाले है। मन हर समय बच्चों में रहता है। क्या कर सकते हैं, घर सूना हो गया। जब से बच्चे गए हैं उनका हर सामान यानी स्कूल बैग, किताबें, कपड़े इत्यादि ज्यों का त्यों रखे हैं। हर रोज साफ सफाई कर जो सामान जहां था वैसे ही रख देते हैं।

विज्ञापन

बच्चों के कमरे को उसी तरह सहेजा है जैसा वो छोड़कर गए थे

uphar Incident: when bell ring we think children have come

अभी भी विश्वास नहीं होता कि बच्चे दूर चले गए हैं। हमने अपने बहुमूल्य 18 वर्ष न्याय पाने के लिए लगा दिए। इतना समय तो हमने अपने बच्चों के साथ नहीं गुजारा जितना अदालत में गुजार दिया। आखिर मिला भी क्या-बच्चों की मौत की कीमत। हम टूट गए हैं। अब नहीं लगता कि देश में आम लोगों के लिए न्याय है।

अगली फोटो गैलरी देखें
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed