संग्रहालय हमेशा से ऐतिहासिक, वैज्ञानिक और सांस्कृतिक संरक्षण के लिए पूरी दुनिया में जाने जाते हैं। मगर, दिल्ली के पालम स्थित यह संग्रहालय एक अनूठी सोच के साथ बनाया गया है।
यह संग्रहालय एक समूह है उन तथ्यों, चित्रों और वस्तुओं का जो पिछले 2500 ईसा पूर्व से आज तक के सारे शौचालयों के विकास को दर्शाता है। इस अनूठी सोच के पीछे डॉ बिंदेश्वर हैं जो पिछले 20 सालों से इस पर काम कर रहें हैं।
इस संग्रहालय के कुछ मॉडलों में से सबसे दिलचस्प मॉडल फ्रांस के राजा लुइस का है। राजा लुइस के सिंहासन के नीचे ही उनका कमोड था, जो वह अपने दरबार में फैसलों को करने के दौरान इस्तेमाल करते थे।
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Toilet museum
- फोटो : Abhinav Mittra
सबसे रोचक बात यह है कि लुइस भोजन अकेले में करते थे मगर अपने सिंहासन को शौचालय की तरह सार्वजनिक तौर पर इस्तेमाल करते थे। इस संग्रहालय में पुराने तरीकों से लेकर आधुनिक तकनीकी के शौचालयों की नुमाइश की गई है। आधुनिक तकनीकी शौचालयों की खास बात है कि यह मशीनें मल को खाद में परिवर्तित कर देती हैं।
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- फोटो : Abhinav Mittra
यहां और कई मॉडल हैं, जिसमें एक 1920 का मॉडल शामिल है। यह एक दो मंजिला शौचालय है जो अमेरिका में इस्तेमाल होता था जिसमें पद और रुतबे के हिसाब से वर्गीकरण को दिखाया गया है।
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- फोटो : Abhinav Mittra
शौचालय के निचले मंजिल में साधारण मज़दूर जाते थे और पहली मंजिल पर मैनेजर। इस संग्रहालय में हमेशा एक गाइड मौजूद रहता है जो आपको इस संग्रहालय के बारे में विस्तार से बताये। यहां के क्यूरेटर बागेश्वर का कहना है कि वह बहुत खुश हैं कि वह यहां काम करते हैं। उन्हें इस बात की भी प्रसन्नता है कि वह देश के स्वच्छता अभियान से भी जुड़े हैं।