नाले के पार पौधों की नर्सरी चलाने वाले बसंत ने बताया कि भगवान का शुक्र है कि उनकी और उनके बेटे की जान बच गई। वह दोनों हादसे के वक्त नाले के पास ही सो रहे थे।
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कार में तेजी से ब्रेक लगने की आवाज सुनकर उनकी नींद खुल गई थी। उन्हें लगा कार रुक जाएगी, लेकिन रफ्तार काफी ज्यादा होने से ब्रेक लगने के बावजूद वह नाले में आकर गिर गई। नाला पार करने के लिए उन्होंने बांस का अस्थायी पुल बनाया है।
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कार की टक्कर से वह भी टूटकर नाले में गिर गया था। बसंत के अनुसार हेड लाइट जलाई हुई कार जब उनके पांच-छह फुट पास आकर नाले में गिरी तो एक पल को उन्हें लगा कि कार कहीं बांस के अस्थायी पुल से उनके ऊपर न चढ़ जाए।
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कोई चेतावनी बोर्ड नहीं लगा
तान्या जिस गोलचक्कर के पास हादसे का शिकार हुई है, वहां सड़क किनारे ही बड़ा सा खुला हुआ नाला है। नाले किनारे कोई रेलिंग या दीवार नहीं बनी गई है। इसके अलावा गोल चक्कर की तरफ आने वाले वाहन चालकों को रफ्तार धीमी करने या अलर्ट करने के लिए दूर-दूर तक कोई चेतावनी बोर्ड भी नहीं लगा है। आसपास मौजूद लोगों ने बताया कि रात के वक्त पहली बार इधर की तरफ आने वाले कार चालक अक्सर गोल चक्कर पर सीधे टक्कर मार देते हैं।
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इसकी एक वजह गोल चक्कर की तरफ आने वाले दो प्रमुख मार्ग पर कुछ दूरी पर बनी ऊंची पुलिया भी है। इस वजह से वाहन चालकों को दूर से गोल चक्कर नजर नहीं आता है। इसके अलावा गोल चक्कर के चारों तरफ की सड़क सही से समतल नहीं है। जगह-जगह पैच वर्क हैं। इस वजह से गोल चक्कर पर गाड़ी हिचकोले लेती है। ऐसे में रफ्तार ज्यादा होने या गोल चक्कर से अनजान होने पर गाड़ी के अनियंत्रित होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।