फॉरेसिंक टीम ने बुराड़ी केस की जांच में पूजा-पाठ का एंगल भी जोड़ दिया है। टीम को शक है कि धूपबत्ती में जहरीला या नशीला रसायन मिला हो सकता है। इसी के चलते परिवार के बाकी लोगों ने फांसी के फंदे को गले लगा लिया। आमतौर पर फॉरेसिंक इस ओर जांच नहीं करता, लेकिन इस केस में उन्होंने इस एंगल पर भी काम शुरू किया है। गौर करने वाली बात है कि पोस्टमार्टम के दौरान किसी भी शव पर बाहरी निशान नहीं मिले हैं।
1 घर 11 मौत: धूपबत्ती में मिला हो सकता है जहरीला रसायन, फॉरेसिंक टीम ने नहीं दिया ध्यान
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इसके बाद पोस्टमार्टम टीम ने ओरल ड्रग के जरिए बेहोश करने की आशंका को खारिज कर दिया है। हालांकि पेट में मिले फ्लूयड की जांच रिपोर्ट आना बाकी है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, घटना के बाद जब पुलिस के साथ फॉरेसिंक टीम मौके पर पहुंची थी उस वक्त घर के एक कमरे में धूपबत्ती की खुशबू महसूस हुई थी। टीम ने इस पर ध्यान न देते हुए सबूतों को एकत्रित किया।
इस में धूपबत्ती के कुछ पैकेट भी शामिल थे। चूंकि तमाम सबूतों की जांच के बाद भी ठोस निष्कर्ष नहीं निकलने पर टीम ने रजिस्टर थ्योरी की ओर ध्यान दिया। बताया जा रहा है कि एक के बाद एक रजिस्टर और उनमथं लिखी पूजा-पाठ की बातें सामने आने के बाद टीम ने लीक से हटकर भी अपनी जांच को मोडने का फैसला लिया। जानकारी के अनुसार फिंगर और फूट प्रिंट में टीम को बाहरी किसी सदस्य के निशान नहीं मिले हैं। इतना ही नहीं फॉरेसिंक टीम ने एफएसएल लैब में भी विशेषज्ञों को इस एंगल पर बिसरा जांच की अपील की है। सूत्रों की मानें तो 11 शवों के बिसरा जांच में आंत, लिवर और गुर्दों में किसी रसायन की परत को जांचना जरूरी है।
दिल्ली के एक फॉरेसिंक विशेषज्ञ ने बताया कि घर से मिले रजिस्टर में जिस तरह से ललित की थ्योरी लिखी है उससे अशांका जताई जा सकती है कि फांसी पर लटकने से पहले परिवार ने पूजा की है। इस दौरान ही उन्हें कुछ नशीला पदार्थ सुंघाया गया होगा तभी सभी फंदे पर लटकने के लिए तैयार हो गए। उधर पोस्टमार्टम रिपोर्ट भी इस ओर इशारा करती है। रिपोर्ट के अनुसार बच्चों और प्रियंका के हाथ व पैर ज्यादा टाइट बंधे थे, जिससे आत्महत्या के प्रति उनकी सहमति न होने का अंदाजा लगाया गया।
पोस्टमार्टम में नहीं मिल सकता रसायन
फॉरेसिंक विशेषज्ञ के अनुसार अगर धूपबत्ती में कोई रसायन होता है तो वह धुंए के जरिए किसी इंसान के फेफड़ों तक पहुंचता है, जिससे फेफड़ों के ऊपरी हिस्से पर मौजूद ऊतकों की क्षमता कम होने लगती है। इसीलिए इंसान की श्वसन गति भी कम होने लगती है। हालांकि इस रसायन की परत लिवर और गुर्दे पर जम सकती है। साथ ही आंतों के हिस्से में भी इसकी मौजूदगी हो सकती है। इसलिए पोस्टमार्टम में इसकी पुष्टि नहीं की जा सकती। बिसरा जांच में जरूर इसकी पहचान हो सकती है।
बताया जा रहा है कि फॉरेसिंक टीम ठग बाबा की थ्योरी पर भी काम कर रही है। अक्सर कई किस्से देखने को मिलते हैं जिनमें धूपबत्ती या प्रसाद खिलाकर लोगों को जहरखुरानी दी जाती है और बाद में उनसे लूटपाट होती है। होश में आने के बाद इंसान को घटना का एहसास होता है। ठीक इसी तरह टीम ने भी धूपबत्ती के साथ घर में मिले प्रसाद की जांच कर रही है।