दिल्ली के बाजार रंगबिरंगी राखियों से सज गए हैं। सदर बाजार इन दिनों केसरिया रंग की राखियों से पटा हुआ है। खास बात यह है कि इस बार डिजाइनर राखी की जगह परंपरागत राखी ने ले लिया है। चीन निर्मित राखी के बहिष्कार की वजह से बाजारों में परंपरागत राखियां ही बिक रही हैं। रक्षाबंधन त्योहार को लेकर बाजार तरह-तरह की राखियों से सजे हुए हैं। सदर बाजार के ज्यादातर व्यापारियों ने राखी बेच रहे हैं। अधिकतर दुकानदार स्वदेश निर्मित राखी की ही बिक्री कर रहे हैं। केसरिया रंग के मौली वाले धागे से निर्मित और रेशम की डोर से सजावट किए गए राखी मार्केट में छाई हुई है।
बाजार में इस बार केसरिया राखी की बहार, चीनी सामान का है बहिष्कार
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अयोध्या में राम मंदिर की झलक इन दिनों राखी के डिजाइन में भी देखने को मिल रहे है। ये राखियां श्री और श्रीराम नाम से सजाई गई हैं। बाजार में वैसी राखी मौजूद हैं जिसमें मंदिर को दर्शाया गया है। वहीं, केसरिया रंग के धागे में सजावटी समान के साथ इस राखी को बनाया गया है। इसके अलावा रेशम की डोर वाली साधारण राखी की भी जमकर बिक्री हो रही है।
इस बार राखी पर रेशम धागे से बनी फूल वाली राखी भी प्रचलन में है। फूल को धागे से बांधा गया है। साधारण से दिखने वाली राखी को देखकर महिला ग्राहक भी अपने बच्चों को यह समझाते दिखाई पड़ रही है कि एक बार फिर पुराना ट्रेंड वापस आ गया है।
सीमा विवाद की वजह से चीन निर्मित सामान का बहिष्कार बाजारों में दिख रहा है। पहली बार रक्षाबंधन के लिए ऊनी धागों से तैयार राखियां भी देखने को मिल रही है। ऊनी धागों की आकर्षक राखियां महिलाओं को भी भा रही है। लोकल के लिए वोकल के लिए यह राखी कुटीर उद्योग को बढ़ावा देने वाली है।
बच्चों को खुश करने वाली राखी भी इन दिनों ट्रेंड में है। दिल्ली के कमला नगर व सरोजनी नगर मार्केट में पबजी राखी, स्वैग वाली राखी, मोगली राखी, ब्रो वन भाई राखी, सुपर ब्रो भाई, डोरेमन, कॉम्बो भाई राखी उपलब्ध है। ये सब गेम वाली राखी बच्चों को खूब पसंद आ रही है। साथ ही चांदी और नग वाली राखियों की भी डिमांड अधिक हैं। बाजार में महिलाओं के लिए जुंबा राखी की खास अहमियत है। जुंबा राखी भी खासी ट्रेंड में हैं। इस राखी में नग लगे हुए हैं। जो सिर्फ युवतियों व महिलाओं के लिए ही तैयार किया गया है। भाईयों की कलाई में सजने वाली राखी से इसकी कीमत अधिक है।बाजार में इन दिनों बीच वाली राखी भी प्रचलन में है। दरअसल व्यापारियों ने पर्यावरण को बेहतर करने के लिए राखी के ऊपर एक बीज को लगाया है। ताकि वह बीज राखी के बाद पौधा लगाने के काम में आ सके।