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ये है उस इंजीनियर की कहानी जिसने खड़ा किया अरबों का बिजनेस, अब दिवालिया होने का डर 

Sun, 13 Aug 2017 03:39 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद
ब्यूरो/अमर उजाला, गाजियाबाद Updated Sun, 13 Aug 2017 03:39 PM IST
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this is how an engineer become millionaire and on the edge of solvency

बुलंदशहर जनपद से सात किलोमीटर दूर मूल रूप से चिट्टा गांव के रहने वाले एक इंजीनियर ने अरबों का बिजनेस खड़ा कर राष्ट्र ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय फलक पर भी अपना मुकाम हासिल किया। सीमेंट से लेकर होटल, एक्सप्रेसवे, अस्पताल, शिक्षण संस्थान समेत कई परियोजनाओं को नई ऊंचाइयां दी।

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हालांकि जेपी बिल्डर को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल ने दिवालिया घोषित कर दिया है। फिलहाल कंपनी को अपना पक्ष रखने के लिए 270 दिनों की मोहलत दी गई है। एक व्यक्ति की अर्श से फर्श तक पहुंचने की कहानी भी रुपहले पर्दे की थीम स्टोरी से कम नहीं है। सिंचाई विभाग में एक इंजीनियर से अरबों का बिजनेस खड़ा करने वाले जेपी ग्रुप के मालिक जयप्रकाश गौड़ का जन्म बुलंदशहर के चिट्टा गांव में 2 जनवरी 1931 को हुआ था। पिता पंडित बलजीत सिंह उस समय प्रदेश में कृषि पर्यवेक्षक के पद पर जनपद सहारनपुर के देवबंद में तैनात थे। वर्ष 1936 में स्थानांतरण होने के बाद पिता बलजीत सिंह जिला मैनपुरी के बेवर में आ गए। जहां पर जयप्रकाश ने कक्षा 1 से कक्षा 4 तक की पढ़ाई पूरी की। 

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इसके बाद स्थानांतरण के दौरान बुलंदशहर के शिकारपुर और फिर अनूपशहर में जयप्रकाश ने 12 तक की पढ़ाई की। इस दौरान वर्ष 1948 में उनका चयन उस समय थामसन इंजीनियरिंग कॉलेज और आज के आईआईटी रुढ़की में हो गया। इंजीनियरिंग में डिप्लोमा के बाद उन्हें उत्तर प्रदेश सरकार के सिंचाई विभाग में नौकरी मिल गई, इसके बाद सरकार की ओर से बेतवा नदी पर माता टीला बांध बनाने का मौका मिला। बांध बनाने के बाद गौड़ ने नौकरी से रिजाइन कर दिया इसके बाद बुलंदशहर से ठेकेदारी शुरू की और इसके बाद कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा।

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बिजनेस को पहुंचाया ऊंचाइयों तक: वर्ष 1987 में जयप्रकाश गौड़ की कंपनी जेपी एसोसिएट लिमिटेड के नाम से बांबे स्टाक एक्सचेंज में रजिस्टर्ड हुई। 1981 में ग्रुप ने हॉस्पिटैलिटी सेक्टर में एंट्री करते हुए इलाके के कई स्थानों पर अस्पताल खोले। जिसमें अनूपशहर और अपने पैतृक गांव चिट्टा में भी अस्पताल का निर्माण करवाया। वहीं शिक्षा के क्षेत्र में काम करते हुए अनूपशहर में पांच साल पहले जेपी विश्वविद्यालय की स्थापना की। इसके अलावा वहां के एलडीएवी इंटर कॉलेज और डीपीबीएस डिग्री कॉलेज का प्रबंधन भी जेपी के हाथों में आ गया। नब्बे के दशक में जेपी ने  जनपद के कई क्षेत्रों में विकास के लिए कई काम कराए। अनूपशहर में जहां मंदिर का निर्माण कराया और गंगा घाटों में सौंदर्यीकरण का काम भी शुरू करा दिया। इसके अलावा बुलंदशहर का एतिहासिक कालाआम चौराहे का सौंदर्यीकरण भी जेपी ग्रुप की देन है।

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रियल स्टेट और सीमेंट कारोबार में भी आजमाया था हाथ: रियल स्टेट कंपनी का गठन करने के दौरान इन्होंने कई प्रोजेक्ट तैयार कराए। 2012 में यमुना एक्सप्रेस-वे का प्रोजेक्ट तैयार कर एक बड़ी उपलब्धि अपने नाम की। वहीं मध्यप्रदेश के रीवा के अलावा बुलंदशहर जनपद के सिकंदराबाद के औद्योगिक क्षेत्र में सीमेंट उद्योग शुरू किया, रियल स्टेट में आए स्लम के चलते कर्जों में बेतहाशा बढ़ोत्तरी होने लगी बढ़ते कर्जों की वजह से उसे कंपनी ने पावर प्लांट और सीमेंट इंडस्ट्री को बेचने की नौबत आ गई। ऐसे में जेपी ग्रुप ने सिकंदराबाद समेत सीमेंट कारोबार के बड़े हिस्से को अल्ट्राट्रेक कंपनी को बेच दिया।

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