राजधानी की पहचान बन चुका सिग्नेचर ब्रिज निर्माण से लेकर उद्घाटन और उसके बाद भी लगातार चर्चा में है। पहले निर्माण में देरी तो उद्घाटन में मारपीट के बाद अब दो डॉक्टरों की मौत से उस पर काला धब्बा लग गया है। वहीं, सेल्फी, कानून के उल्लंघन व अश्लील हरकतों को लेकर भी ब्रिज चर्चा में है। आगे पढ़ें सभी कारण विस्तार से...
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- फोटो : अमर उजाला
नींव रखे जाने के बाद सिग्नेचर ब्रिज का निर्माण 14 वर्ष में पूरा हुआ। निर्माण की लागत बढ़ने से विवादों में छाया रहा। हाल ही में उद्घाटन के दौरान आप विधायक अमानतुल्लाह खान और भाजपा सांसद एवं प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी के बीच हुई धक्का-मुक्की के बाद फिर से चर्चा में आ गया। तिवारी ने अमानतुल्लाह खान के अलावा मुख्यमंत्री को भी लपेटे में लेकर मामला दर्ज करवा दिया।
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उद्घाटन के बाद सिग्नेचर ब्रिज पर तमाम नियम कानून को दरकिनार किया जा रहा है। ब्रिज पर सेल्फी लेना, उल्टी दिशा में वाहनों की दौड़ के अलावा देर रात शराब पार्टी व पिकनिक स्पॉट बनकर रह गया है। वाहन चालकों की बढ़ती हरकतों के कारण पुलिस को भी कार्रवाई के लिए मजबूर होना पड़ा।
यह सब हो ही रहा था कि सरेआम किन्नरों ने कपड़े उतार अश्लील हरकतें कर ब्रिज का नाम बदनाम कर दिया। हर दिन सिग्नेचर ब्रिज किसी न कि सी बात को लेकर सुर्खियों में रहा है। शुक्रवार सुबह ब्रिज पर हुई दो युवा डॉक्टरों की मौत ने सभी को हिलाकर रख दिया।
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ब्रिज का निर्माण करने वाली कंपनी का तर्क है कि उसने निर्माण कार्य पूरा कर दिया लेकिन घटनास्थल पर गैप ने उसके तर्कों की पोल खोल दी। यह ठीक है कि बाइक की रफ्तार ज्यादा रही होगी लेकिन जिस प्रकार गैप से युवक नीचे गिरा, उस पर सवाल उठने लगे हैं। यदि ब्रिज पर गैप न होता तो शायद कम से कम एक युवक की जान तो बच ही जाती।