सोशल मीडिया पर अपनी तस्वीरों पर लाइक व कमेंट पाने के चक्कर में इन दिनों युवा पीढ़ी अनजाने में एक ऐसी बड़ी बीमारी की ओर बढ़ रही है जिसका उसे एहसास तक नहीं है। (खबर व फोटो साभारः मेल टुडे)
जब एक 18 साल की डीयू छात्रा एम्स के ईएनटी विभाग में अपने नाक की सर्जरी कराने गई तो वहां मौजूद सर्जन ने उसे मनोचिकित्सक वार्ड में जाने की सलाह दी। ऐसा इसलिए क्योंकि डॉक्टर ने उसका चेकअप करने के बाद पाया कि उसके नाक में कोई दिक्कत नहीं है बल्कि उसे तुरंत उपयुक्त इलाज की जरूरत है।
ईएनटी विभाग में इस तरह की सर्जरी कराने के लिए आने वाली वह छात्रा पहली नहीं थी जिसे सर्जन ने मनोचिकित्सा विभाग जाने की सलाह दी थी। पिछले कुछ महीनों में ऐसे कम से दो से तीन केस एम्स और सर गंगाराम अस्पताल में आ चुके हैं, जिस बीमारी को आजकल डॉक्टर 'सेल्फीसाइड' का नाम देते हैं। एक ऐसी बीमारी जिसमें शख्स को बार-बार अपने मोबाइल के सामने पोस देकर सेल्फी खींचनी होती है और फिर उसे शेयर कर लोगों के फीडबैक चाहिए होते हैं।
एम्स के मनोचिकित्सा विभाग के डॉक्टर नंद कुमार का कहना है कि, ये सभी मरीज डॉक्टर से अपने बॉडी के विभिन्न पोश्चर और उनमें होने वाली गड़बड़ियों के बारे में जानना चाहते थे।
क्या है सेल्फीसाइड
डॉक्टर जो डीयू छात्रा का इलाज कर रहे थे कहते हैं कि वो चाहती थी कि डॉक्टर उसे यह सुनिश्चित करे कि वो पूरे दिन खूबसूरत दिखेगी और सोशल मीडिया पर डाली जाने वाली उसकी सभी तस्वीरों को लोगों का अच्छा रिस्पॉन्स मिलेगा। इसके लिए उसने अपने कॉलेज तक से लापरवाही की और खाना भी छोड़ दिया। हालांकि डॉक्टर का कहना है कि काउंसिलिंग के बाद अब वो काफी ठीक है और अब वो नाक की सर्जरी नहीं कराना चाहती।