21 जनवरी, दिन सोमवार, सुबह के दस बजे थे। दिल्ली के त्यागराज स्टेडियम के बाहर भीड़ धीरे-धीरे बढ़ने लगी। गेट नंबर सात के सामने हजारों युवा हाथों में सर्टिफिकेट और मार्कशीट लिए पंक्तिबद्ध खड़े थे। उनकी यह कतार बढ़ते-बढ़ते करीब आधा किलोमीटर लंबी हो चुकी है। त्यागराज स्टेडियम एक ऐसे कैनवास में बदल चुका था जिस पर देश में फैली 'बेरोजगारी की तस्वीर' साफ देखी जा सकती है। यहां दो दिवसीय 'विशाल रोजगार मेला' चल रहा है जिसमें भाग लेने दिल्ली और आसपास के हजारों बेरोजगार युवा पहुंचे हैं।
क्या है दिल्ली के उस रोजगार मेले की हकीकत, जहां नौकरी की आस में देशभर से उमड़े हजारों युवा
स्टेडियम के बाहर दिल्ली पुलिस के जवान तैनात हैं जो हर आने वाले की तलाशी लेने के बाद उन्हें अंदर भेज रहे हैं। अंदर पहुंचते ही एक बड़ा-सा फ्लेक्स लगा है जिसके इर्द-गिर्द लोग भीड़ लगाए खड़े हैं। यह फ्लेक्स लोगों को निर्देशित कर रहा है कि उनकी योग्यता के अनुसार उन्हें नौकरी पाने के लिए किस दिशा में बढ़ना है। इस फ्लेक्स से मार्गदर्शन लेकर लोग अलग-अलग स्टॉल की ओर बढ़ रहे हैं। अलग-अलग कंपनियों के करीब 75 स्टॉल यहां लगे हैं। दिल्ली के श्रम मंत्री गोपाल राय के अनुसार इस रोजगार मेले में पहुंची ये 75 कंपनियां कुल 12,700 से अधिक नौकरियाँ देने जा रही हैं। दिल्ली की अदालत ने 1984 के सिख विरोधी दंगे मामले में कांग्रेस नेता सज्जन कुमार को 28 जनवरी को पेश किए जाने को लेकर वारंट जारी किया। नौकरी देने वाली इन कंपनियों में पतंजलि, ओला, इंडिया बुल्ज, टाइम्स ऑफ़ इंडिया और एलआईसी जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। दिल्ली सरकार द्वारा आयोजित यह रोजगार मेला पिछले कुछ सालों से हर साल आयोजित किया जा रहा है।
दिल्ली सरकार के रोज़गार निदेशालय के अनुसार पिछले साल इस मेले में क़रीब 40 हजार लोगों ने भाग लिया था। इनमें से क़रीब सात हजार लोग शॉर्ट लिस्ट हुए थे जिन्हें चयन प्रक्रिया के दूसरे दौर में शामिल होने का मौका मिला। इसी तरह साल 2017 में 40 हज़ार लोगों ने इस मेले में शिरकत की जिनमें से 12 हजार शॉर्ट लिस्ट हुए थे और साल 2015 में कुल 12 हजार प्रतिभागियों में से करीब 7700 शॉर्ट लिस्ट हुए थे।
दिल्ली के रोजगार निदेशालय में बतौर अनुभाग अधिकारी कार्यरत राजेश तंवर बताते हैं, "हमारे पास शॉर्ट लिस्ट किए गए लोगों का ही आंकड़ा मौजूद है। अंततः कितने लोगों को नौकरी मिली यह आंकड़ा हमारे पास नहीं होता क्योंकि फाइनल सलेक्शन यहां नहीं होता। यहां से कंपनियां लोगों को शॉर्ट लिस्ट करती हैं और फिर चयन का अगला राउंड कंपनी में ही होता है। इसलिए हमारे पास सिर्फ़ शॉर्ट लिस्ट किए गए लोगों की ही संख्या होती है।" राजेश तंवर यह भी कहते हैं, "शॉर्ट लिस्ट किए गए अधिकतर लोगों को नौकरी मिल ही जाती है।"
लेकिन रोहिणी की रहने वाली 25 वर्षीय शीतल इस बात से इत्तेफाक नहीं रखती। शीतल पिछले साल भी इस मेले में पहुंची थी और उनको एक कंपनी ने कम्प्यूटर ऑपरेटर के पद के लिए शॉर्ट लिस्ट भी कर लिया था। लेकिन शीतल कहती हैं, "कंपनियां यहां जो दावे करती हैं और जितना पैसा देने की बात कहती हैं, असल में उतना नहीं देती। पिछले साल जब यहां से शॉर्ट लिस्ट होने के बाद मैं दूसरे राउंड के लिए कंपनी के ऑफिस पहुंची तो मुझे बताया गया कि मुझे रोज 12 घंटे की शिफ्ट करनी होगी वरना उतने पैसे नहीं मिलेंगे जितने शुरुआत में बताए गए थे।"