पूर्व कानून मंत्री एवं वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी का रविवार को 95 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर सुबह करीब 7 बजकर 45 मिनट पर अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे जेठमलानी का आगामी 14 सिंतबर को 96वां जन्मदिन था। उनके निधन की सूचना मिलते ही राजनीतिक और वकालत के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। लोदी रोड स्थित सीएनजी शवगृह में शाम को उनका अंतिम संस्कार कर दिया गया। इस दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, वरिष्ठ नेता शरद यादव सहित तमाम नेताओं ने उन्हें श्रद्धांजलि दी।
आइए जानते हैं कि कैसे 77 साल तक वकालत करने वाले जेठमलानी से सिर्फ वकील ही नहीं बड़े-बड़े जज भी खौफ खाते थे...
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ram jethmalani
- फोटो : सोशल मीडिया
हाई प्रोफाइल मर्डर हो या घोटालों के अभियुक्तों का बचाव। या फिर आय से अधिक संपत्ति के मामलों के अभियुक्तों को छुड़ाना। ये ऐसे वकील थे जो हमेशा लहर के खिलाफ ही तैरते नजर आए। इनके कोर्टरूम में घुसते ही बड़े-बड़े वकील ही नहीं जज भी खौफ खाते थे। पूर्व कानून मंत्री एवं वरिष्ठ वकील राम जेठमलानी का रविवार को 95 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने नई दिल्ली स्थित अपने आवास पर सुबह करीब 7 बजकर 45 मिनट पर अंतिम सांस ली। लंबे समय से बीमार चल रहे जेठमलानी का आगामी 14 सिंतबर को 96वां जन्मदिन था।
96 वर्ष के होने के बाद भी उनकी याद्दाश्त, सेंस ऑफ ह्यूमर और आक्रामक शैली में जरा भी कमी नहीं आई थी। उनके पास वकालत का 77 साल का अनुभव था। यानी सुप्रीम कोर्ट के ज्यादातर जजों की उम्र जेठमलानी के अनुभव से उन्नीस पड़ती है। विवादों से उन्हें कभी परहेज़ नहीं रहा और देश के लगभग हर बड़े मामले में वकील या नेता के रूप में भूमिका रही। सिर्फ 17 साल की उम्र में क़ानून की डिग्री लेने वाले राम जेठमलानी ने 13 साल की उम्र में ही मैट्रिक पास कर ली थी।
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शुरू से ज़हीन माने जाने वाले जेठमलानी ने अविभाजित भारत के कराची शहर के एससी शाहनी लॉ कालेज से क़ानून में ही मास्टर्स की डिग्री ली और जल्द ही उन्होंने अपनी 'लॉ फर्म' भी बना ली। कराची में उनके साथ वकालत पढ़ने वाले दोस्त एके बरोही भी उनके साथ 'लॉ फर्म' में थे। यह बात हो रही है विभाजन से पहले की। मगर जब भारत आज़ाद हुआ और विभाजन हुआ तो दंगे भड़क गए। अपने मित्र की सलाह पर जेठमलानी भारत चले आए।
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संयोग देखिए कि बाद में दोनों मित्र अपने अपने देशों के क़ानून मंत्री बने। वर्ष 1923 के 14 दिसंबर को सिंध के शिकारपुर में जन्मे राम जेठमलानी ने अपने करियर की शुरुआत सिंध में बतौर प्रोफ़ेसर की थी। राम जेठमलानी ने हर काम उम्र से पहले ही किया। पढ़ाई भी और शादी भी। 18 साल की उम्र में ही उनकी शादी दुर्गा से हुई और बँटवारे से ठीक पहले उन्होंने अपनी तरह की वकील रत्ना शाहनी से शादी की। उनकी दोनों पत्नियां और चार बच्चे एक साथ रहते थे।