‘अब तो आस टूटने लगी है भैया। पता नहीं कोई हमारी सुध लेगा भी या नहीं? जैसे ही दिन छिपता है ठंड बढ़ जाती है। रात का एक-एक मिनट काटना भारी होता है। सुबह जब हम उठते हैं तो ओस से हमारे कंबल पूरी तरह गीले होते हैं...।’ यह बताते-बताते एक दिव्यांग युवक की आंखों से आंसू छलकने लगे। आगे तस्वीरों में देखिए इनका प्रदर्शन और पढ़ें पूरी स्टोरी...
अब तो आस टूटने लगी है भैया... बोलते ही छलके छह दिन से भूख हड़ताल पर बैठे दिव्यांग कैंडिडेट के आंसू
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उसने बताया कि रोजाना कोई न कोई साथी बीमार होकर अस्पताल पहुंच रहा है, लेकिन कोई उनका हाल तक लेने नहीं आया है। मंडी हाउस पर छह दिनों से धरने और भूख हड़ताल पर बैठे दिव्यांग अब निराश होने लगे हैं। रविवार को बातचीत के दौरान कई दिव्यांग अपने आंसुओं के सैलाब को रोक नहीं पाए।
अपनी नियुक्ति पत्र की मांग को लेकर मंडी हाउस में अनशन पर बैठे दिव्यांगों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। रविवार को छठे दिन दिव्यांगों के एक सहयोगी मंगल की तबीयत बिगड़ गई और वह बेहोश हो गया।
समूह में शामिल मनीष ने बताया कि मंगल को राममनोहर लोहिया अस्पताल लेकर गए। आरोप है कि दो घंटे तक अस्पताल में इलाज नहीं होने पर मंगल को निजी अस्पताल ले जाया गया, जहां उसे ड्रिप लगा दिया गया।
इलाज होने के बाद वह ड्रिप लगाकर वापस धरनास्थल पर पहुंच गया। हालात ऐसे हैं कि ड्रिप भी पुलिस के बैरिकेड पर टांगी गई है।
क्या है मामला
राष्ट्रीय विकलांग संघर्ष समिति के नवीन ने बताया कि इससे पहले भी कई बार विरोध कर चुके हैं लेकिन दिव्यांगों की मांगों पर सरकार कोई सुनवाई नहीं कर रही है। दो अधिसूचना के तहत 3148 ग्रुप डी के पदों के लिए आवेदन मंगवाए गए थे लेकिन परीक्षा में उत्तीर्ण होने के बाद भी नौकरियां देने में आनाकानी की जा रही है। नवीन ने आरोप लगाया कि नियमों की अनदेखी करते हुए 1025 पदों पर चहेते उम्मीदवारों की नियुक्ति कर दी गई। दो अलग अलग अधिसूचना जारी करते हुए दिव्यांगों की श्रेणी में भी बढ़ोतरी कर कुछ पदों पर नियुक्तियां हुई जबकि शेष उम्मीदवारों की मांगों पर कोई सुनवाई नहीं की गई है।