नागरिकता संसोधित कानून (सीएए), राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) को लेकर देशभर में पिछले कई दिनों से प्रदर्शन जारी है। इस प्रदर्शन में जामिया मिल्लिया इस्लामिया, जवाहर लाल विश्वविद्यालय, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय जैसे कई नामी विश्वविद्यालय शामिल हैं। वहीं, कड़कड़ाती ठंड में दिल्ली के शाहीन बाग में बच्चे, बूढ़े और महिलाएं धरना प्रदर्शन कर रही हैं। इसी बीच रविवार को लोगों ने सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ जामिया मिल्लिया इस्लामिया से लेकर शाहीन बाग तक कैंडल मार्च निकाला। इस दौरान लोगों ने सरकार के खिलाफ भी खूब नारेबाजी की।
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नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन
- फोटो : ANI
जामिया से शुरू हुआ नागरिकता संसोधित कानून (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) का विरोध राजधानी के कई इलाकों तक पहुंच चुका है। सूत्रों के मुताबिक विरोध को हवा देने वाले लोगों की पहचान की जा रही है, जो माहौल खराब कर अराजकता का माहौल उत्पन्न करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं, खुफिया एजेंसियों ने 16 लोगों को चिन्हित भी किया है।
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नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन
- फोटो : ANI
शाहीन बाग में एक महीने से नागरिकता कानून के खिलाफ महिलाएं सड़कों पर बैठी हुई हैं, जिसकी वजह से कानून व यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।महिलाओं के प्रदर्शन में रहने से पुलिस भी उन पर कार्रवाई से पीछे हट रही है।
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शाहीन बाग प्रदर्शन
- फोटो : अमर उजाला
जेएनयू, जामिया, डीयू सहित कई अन्य शिक्षण संस्थाओं के छात्राओं को लगाया गया है। इन छात्राओं ने हर इलाके में महिलाओं का एक व्हाट्सएप ग्रुप बना रखा है, जो हर दिन प्रदर्शन की कार्ययोजना ग्रुप पर भेजती हैं। एजेंसियां ऐसे लोगों की पहचान कर उनकी कॉल डिटेल को भी खंगाल रही है।सर्विलांस से लगातार हर उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था को खराब करने वालों के खिलाफ जल्द वक्त आने पर बड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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शाहीन बाग में प्रदर्शनकारी
- फोटो : अमर उजाला
बता दें कि देशभर में नागरिकता कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन में कई लोगों की जान जा चुकी है। भारत ही नहीं विश्व में भी इस कानून के खिलाफ प्रदर्शन चल रहा है। वहीं, राजनीतिक पार्टियां कानून को वापस लेने के लिए भाजपा सरकार पर दबाव बना रही हैं जबकि सरकार इससे पीछे हटने को तैयार नहीं है।