जेबकतरों से रहें सावधान...। मेट्रो सफर में अगर ऐसी उदघोषणा होती है तो तत्काल सतर्क हो जाने की जरूरत है। मेट्रो में बढ़ती भीड़भाड़ के साथ ही मोबाइल चोरी और जेबतराशी की घटनाएं फिर बढ़ने लगी हैं। कोरोना काल में आपराधिक घटनाओं का गिरता ग्राफ एक बार फिर चढ़ने लगा है। ऐसी घटनाएं ज्यादा भीड़भाड़ वाले इंटरचेंज स्टेशनों के नजदीक होती हैं।
मेट्रो में जेबकतरों से रहें सावधान: हर महीने होती हैं 200 घटनाएं, इन स्टेशनों पर अधिकतर लोग हो रहे शिकार
यात्रियों की सुरक्षा के लिए दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (डीएमआरसी) की तरफ से यह उदघोषणा की जाती है ताकि उन्हें वित्तीय नुकसान से बचाया जा सके। मेट्रो पुलिस के मुताबिक, ऐसी घटनाएं खासतौर पर आईएसबीटी कश्मीरी गेट, राजीव चौक सहित सभी बड़े इंटरचेंज स्टेशनों पर ऐसी घटनाएं होने की आशंका अधिक रहती है।
कोरोना काल में मेट्रो सेवाएं करीब साढ़े पांच महीने बंद रही। धीरे धीरे मेट्रो में यात्रियों की संख्या में बढ़ोतरी के बाद फिलहाल 47 लाख से अधिक यात्राएं अलग अलग लाइनों पर हो रही हैं। यात्राएं बढ़ने से मोबाइल, पर्स चोरी की घटनाएं भी बढ़ने लगी हैं। कई बार मेट्रो पुलिस की सतर्कता से घटनाएं सुलझा ली जाती हैं। दिल्ली मेट्रो के मुताबिक यात्रियों की सुरक्षा के लिहाज से सभी लाइनों पर उदघोषणाएं की जाती हैं ताकि सफर में उन्हें कोई परेशानी न हो।
हर महीने होती हैं करीब 200 घटनाएं, 57 फीसदी सुलझाए गए
मेट्रो पुलिस के मुताकिक इस साल अब तक 1800 एफआईआर दर्ज किए गए हैं। इनमें करीब 1400 घटनाएं जेबतराशी और पर्स चोरी की घटनाओं से संबंधित है। 400 शिकायतें दूसरे तरह के अपराधों से संबंधित हैं। औसतन हर महीने दिल्ली मेट्रो में ऐसी 200 घटनाएं हो रही हैं। मेट्रो डीसीपी जितेंद्र मणि के मुताबिक भीड़भाड़ में ऐसी घटनाओं को अंजाम दे देते हैं। सूचना मिलने के बाद उन्हें पकड़ा भी जाता है। मेट्रो पुलिस की मुस्तैदी से इस साल अब तक दर्ज होने वाले करीब 57 फीसदी मामले सुलझाए जा चुके हैं।
आईएमआई नंबर को नुकसान पहुंचाने से मामले सुलझाने में हो रही है देरी
मोबाइल चोरी की घटनाओं को अंजाम देने के बाद अधिकतर अपराधी चुप्पी साध लेते हैं। कई बार आरोपियों तक पहुंचने में काफी वक्त लग जाता है। पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक अगर चोरी के बाद आरोपी दूर दराज के राज्यों या नेपाल पहुंच जाए तो उनकी तलाश में अधिक वक्त लगता है। कई बार मोबाइल के आईएमईआई नंबर भी तोड़ दिए जाते हैं तो इससे भी परेशानी होती है। पहले के मामले सुलझाने के बाद बरामद मोबाइल यात्रियों को सौंप दिए जाते हैं।